महाराष्ट्र में लागू हुआ धर्मांतरण रोधी कानून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, जबरन धर्म परिवर्तन पर होगी 10 साल तक की जेल

मुंबई। महाराष्ट्र में जबरन, धोखाधड़ी, लालच या शादी का झांसा देकर कराए जाने वाले अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार का नया कानून आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहमति मिलने के बाद ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ (Maharashtra Freedom of Religion Act, 2026) को राज्य के आधिकारिक राजपत्र (गजट) में अधिसूचित कर दिया गया है।

इस कानून के लागू होने के साथ ही महाराष्ट्र अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सख्त कानून प्रभावी हैं।

नए कानून के मुख्य प्रावधान और सख्त सजाएं

  • जबरन धर्मांतरण पर कठोर सजा: बलपूर्वक, गलत जानकारी देकर, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन या शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन कराने को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।

    • पहली बार दोषी पाए जाने पर: 7 साल तक की जेल।

    • दोबारा अपराध करने पर: सजा बढ़ाकर 10 साल तक की जा सकती है।

  • परिवार के सदस्य भी दर्ज करा सकेंगे FIR: केवल पीड़ित ही नहीं, बल्कि उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार भी अवैध धर्मांतरण के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के नियम (60 दिनों का नोटिस अनिवार्य)

यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा:

  1. DM को पूर्व सूचना: धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित रूप में सूचित करना होगा।

  2. सत्यापन प्रक्रिया: धर्म परिवर्तन के बाद भी तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धर्म परिवर्तन बिना किसी दबाव या लालच के पूरी तरह स्वैच्छिक है।

सरकार का रुख: ‘स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह पर रोक नहीं’

महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना नहीं है।

  • अंतरधार्मिक विवाह सुरक्षित: अपनी मर्जी से किए जाने वाले अंतरधार्मिक विवाह और स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगे।

  • पारदर्शिता: कानून का मुख्य उद्देश्य केवल धोखाधड़ी, जबरन और अवैध तरीकों से कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोककर प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।

 

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