वॉशिंगटन/तेहरान: मिड-ईस्ट (Middle East) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान को रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलने के लिए सख्त समय-सीमा (अल्टीमेटम) दे दी है। वाशिंगटन ने दोटूक शब्दों में मांग की है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले न करने और मार्ग खुला रखने का सार्वजनिक ऐलान करे। अब पूरी दुनिया की नजरें शनिवार को ओमान में होने वाली इस हाई-स्टेक वार्ता पर टिक गई हैं, जिसे युद्ध और शांति के बीच का आखिरी मौका माना जा रहा है।
एक-चौथाई वैश्विक ऊर्जा का रास्ता, टोल टैक्स पर ठनी
अमेरिका चाहता है कि ईरान बिना किसी शर्त के यह घोषणा करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य के सभी नौवहन चैनल अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुले रहेंगे और वहां से गुजरने वाले कार्गो से कोई अवैध ‘टोल’ या टैक्स नहीं वसूला जाएगा। आपको बता दें कि यह जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है, क्योंकि दुनिया के कुल समुद्री तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत (एक-चौथाई) हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल संकट गहरा सकता है।
‘तो वह ईरान के लिए अच्छा दिन नहीं होगा’ – अमेरिका की खुली चेतावनी
तनाव की मुख्य वजह बीते 17 जून को हुए एक समझौते की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। हाल ही में तीन बड़े वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका और खाड़ी देशों ने इसका सीधा ठीकरा ईरान पर फोड़ा था, जिसके बाद दोनों पक्षों में सैन्य झड़पें भी हुईं। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर ओमान वार्ता में ईरान ने झुकने से इनकार किया, तो अंजाम बेहद भुगतने होंगे। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ओमान वार्ता के बाद उनका रुख सकारात्मक नहीं होता, तो यह उनके लिए अच्छा दिन नहीं होगा।”
ट्रंप बोले ‘युद्धविराम खत्म’, ईरान ने कहा- झुकेगा नहीं राष्ट्र
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जलती आग में घी डालने का काम किया है। ट्रंप ने साफ कहा कि बातचीत भले ही चल रही हो, लेकिन “युद्धविराम अब खत्म हो चुका है।” दूसरी तरफ, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि तेहरान ने खुद बातचीत की भीख मांगी है। बघाई ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने सीजफायर तोड़ा, तो ईरान इसका “करारा और जवाबी” सैन्य एक्शन से जवाब देगा।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने भी तेहरान का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे वाशिंगटन पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं करते और ईरानी राष्ट्र कभी किसी के दबाव या दमन के आगे नहीं झुकेगा।
28 फरवरी के हमले के बाद से बंद है रास्ता
गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक संयुक्त हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अधिकांश विदेशी जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। ईरान तब से सभी जहाजों को अपने निर्देशों का पालन करने और सिर्फ तय रास्तों से जाने के लिए मजबूर कर रहा है। 17 जून के समझौते के तहत ईरान 60 दिनों तक सुरक्षित आवाजाही पर राजी हुआ था, जिसकी मियाद अब खत्म होने की कगार पर है। शनिवार को ओमान में होने वाली ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और क्षेत्रीय मध्यस्थों की यह बैठक तय करेगी कि खाड़ी देश शांति की ओर बढ़ेंगे या महायुद्ध की ओर।















