राम मंदिर चंदा कांड में एक और महा-खुलासा: ‘मुन्नाभाई’ टिन्नू यादव ने बना रखा था वीआईपी दर्शन का अवैध वसूली नेटवर्क; VHP अध्यक्ष ने चंपत राय पर दिया बड़ा बयान

अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे गहराई में जा रही है, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार और धोखेबाज़ी की ऐसी परतें खुल रही हैं जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। मामले की कमान संभाल रही विशेष जांच दल (SIT) के हाथ अब एक और बेहद सनसनीखेज सुराग लगा है। जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने अपने साथियों के साथ मिलकर प्रभु श्री राम के दर्शन के नाम पर एक ‘संगठित वसूली रैकेट’ (Extortion Network) बना रखा था। यह शातिर गिरोह देश-विदेश से आने वाले भोले-भले श्रद्धालुओं से वीआईपी दर्शन कराने के नाम पर हर दिन लाखों रुपये ऐंठता था और शाम होते ही इस काली कमाई का आपस में बंदरबांट कर लिया जाता था।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद शुरू हुआ ‘कमीशन का खेल’, कई और कर्मचारी रडार पर

सूत्रों के मुताबिक, जनवरी में हुई भव्य प्राण प्रतिष्ठा के बाद जब अयोध्या में रामभक्तों का सैलाब उमड़ना शुरू हुआ, तो इस गिरोह ने आपदा में अवसर तलाश लिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और लंबी लाइनों का फायदा उठाकर वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध वसूली का यह गंदा खेल बेहद बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया गया। एसआईटी की प्रारंभिक जांच इस बात की ओर पुख्ता संकेत कर रही है कि इस रैकेट में सिर्फ गिरफ्तार हो चुके 8 आरोपी ही शामिल नहीं हैं, बल्कि मंदिर प्रशासन के कुछ अन्य अंदरूनी सेवादार, सुरक्षाकर्मी और बाहरी दलाल भी शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब इन सभी संदिग्धों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही हैं।

मुफ्त मिलने वाले वीआईपी पास को मोटी रकम में बेचता था गिरोह

एसआईटी ने अपनी तफ्तीश में पाया कि इस गिरोह ने मंदिर की पवित्र व्यवस्था का बेहद भद्दे तरीके से दुरुपयोग किया। दरअसल, राम मंदिर में सामान्य भक्तों के लिए लंबी कतारों की व्यवस्था है, जबकि प्रोटोकॉल के तहत आने वाले विशिष्ट अतिथियों (VVIP) को कम समय में दर्शन कराने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा विशेष पास जारी किए जाते हैं। ट्रस्ट की ओर से ये पास पूरी तरह से निःशुल्क (फ्री) होते हैं। लेकिन टिन्नू यादव और उसके गुर्गों ने इसी व्यवस्था में सेंध लगा दी। वे दूर-दराज से आए अमीर श्रद्धालुओं को बिना लाइन के तुरंत दर्शन कराने का झांसा देते थे और उनसे प्रति व्यक्ति हजारों रुपये वसूलते थे।

क्या चंपत राय पर होगी बड़ी कार्रवाई? विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने साफ किया रुख

इधर, चढ़ावा चोरी और अवैध वसूली के इस महाविवाद की आंच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंच चुकी है, जिनसे एसआईटी पहले ही कई घंटों तक तीखी पूछताछ कर चुकी है। चंपत राय ने हालांकि अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन इस पूरे कांड से राम मंदिर की साख पर लगे बट्टे को देखते हुए विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर में दान की चोरी के लिए विश्व हिंदू परिषद कतई जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन अपने उपाध्यक्ष चंपत राय के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले पुलिस और एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगा।

‘दुनियाभर के हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं, किसी भी दोषी को बख्शने का सवाल ही नहीं’

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, “राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर हुई यह लूट और धोखाधड़ी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसने दुनियाभर में फैले करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था और भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। इस शर्मनाक कृत्य के लिए कोई भी बहाना बनाने या किसी का बचाव करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। हम खुद चाहते हैं कि पुलिस और उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी इस मामले के हर एक पहलू की इतनी बारीकी से जांच करे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। जिस भी व्यक्ति पर आरोप साबित होंगे, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे सजा भुगतनी ही होगी।”

 

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