अयोध्या/वाराणसी: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे होते जा रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला के वाराणसी कनेक्शन के बाद अब उसके रहने के ठिकाने यानी कौशलपुरी स्थित एक योग सेंटर पर पुलिस की छापेमारी ने पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी है। जांच के दौरान योग सेंटर से एक ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ छोटा बक्सा और एक संदिग्ध काले रंग का बैग बरामद हुआ है, जिसने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं।
योग सेंटर में छिपा था आरोपी का सच
योग सेंटर की प्रशिक्षिका सीमा तिवारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर रोशनी डालते हुए बताया कि अविनाश शुक्ला अपने भाई अभिषेक के साथ यहां रह रहा था। अभिषेक पिछले 10 सालों से योग सेंटर से जुड़ा था और पिछले 4-5 वर्षों से एक निजी स्कूल में नौकरी कर रहा था। अविनाश को उसका भाई ही यहां लेकर आया था। बताया जा रहा है कि यहां आने के कुछ ही समय बाद अविनाश की नौकरी राम मंदिर में लग गई थी। 5 जून को पुलिस के योग सेंटर पहुंचने के बाद से ही संस्था की छवि खराब होने के डर से अविनाश को वहां से जाने के लिए कह दिया गया था।
जेल में दर्ज हुआ आरोपी का बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT और अयोध्या पुलिस अब आरोपियों की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में रविवार को पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर विवेचक क्षेत्राधिकारी अयोध्या ने विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया था।
रिमांड और दस्तावेजों की पड़ताल
न्यायालय से मिली अनुमति के बाद पुलिस ने जिला कारागार में बंद अविनाश शुक्ला का बयान दर्ज किया है। पुलिस का तर्क था कि 28 जून को अविनाश के घर पर हुई सर्च और सीजर की कार्रवाई के दौरान बैंक पासबुक और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। इन दस्तावेजों की सत्यता और पूरे रैकेट में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए अविनाश का जेल में बयान दर्ज करना अत्यंत आवश्यक था। अब पुलिस इन बयानों और बरामद दस्तावेजों का मिलान कर आगे की कार्रवाई को अंजाम दे रही है।












