नई दिल्ली/देवरिया। वेनेजुएला में मर्चेंट नेवी में कार्यरत एक भारतीय नाविक की संदिग्ध मौत के बाद भारत लौटे उसके शव की स्थिति देखकर हर कोई दंग रह गया है। 33 वर्षीय नाविक राकेश चौहान के पार्थिव शरीर से मस्तिष्क (दिमाग), हृदय (दिल), फेफड़ों और किडनी समेत लगभग सभी प्रमुख आंतरिक अंग गायब मिलने से हड़कंप मच गया है। इस खौफनाक खुलासे के बाद मृतक के परिजनों ने हत्या के बाद अंग तस्करी (ऑर्गन ट्रैफिकिंग) की आशंका जताते हुए केंद्र सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, ‘फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया’ (FSUI) ने भी इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए वेनेजुएला के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और भारतीय दूतावास से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
मर्चेंट नेवी की नौकरी के लिए वेनेजुएला गए थे यूपी के राकेश
मृतक नाविक की पहचान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के लगड़ा बाजार टोला के रहने वाले राकेश चौहान के रूप में हुई है। राकेश नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी के एक जहाज पर अकुशल श्रमिक/नाविक के रूप में नौकरी करने वेनेजुएला गए थे, उन्हें ‘एक्सफिनिटी’ नाम की कंपनी के जरिए भेजा गया था। राकेश की शादी साल 2023 में हुई थी और उनका एक 6 महीने का मासूम बेटा भी है। वह अपने पूरे परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन मई 2026 में अचानक परिवार को उनकी मौत की खबर मिली, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उनके शव को भारत लाया गया।
बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के भेजा शव, कंपनी के दावों में बड़ा ‘झोल’
FSUI के मुताबिक, वेनेजुएला के अधिकारियों और संबंधित कंपनी ने राकेश का शव तो भारत भेज दिया, लेकिन मौत की असली वजह को लेकर भारी गोपनीयता बरती। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि शव के साथ कोई पोस्टमार्टम रिपोर्ट या आधिकारिक मेडिकल दस्तावेज नहीं भेजे गए। शुरुआत में कंपनी के अधिकारियों ने परिजनों को फोन पर बताया था कि राकेश जहाज पर अचानक गिर गए थे, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनका इलाज चल रहा है। अगली ही सुबह दूसरा फोन आया कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 5% है और उसी शाम मौत की पुष्टि कर दी गई। परिजनों ने जब पूछा, तो पहले गिरने की चोट से मौत बताई गई, लेकिन बाद में कागजों पर बयान बदलकर ‘कार्डियक अरेस्ट’ (दिल का दौरा) लिख दिया गया।
भारतीय डॉक्टरों के दोबारा पोस्टमार्टम में सामने आई रोंगटे खड़े करने वाली सच्चाई
शव के भारत पहुंचने पर जब परिजनों के आग्रह पर भारतीय डॉक्टरों ने दोबारा पोस्टमार्टम (Re-Postmortem) किया, तो एक बेहद चौंकाने वाली और डरावनी सच्चाई सामने आई। FSUI ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक तौर पर बताया कि राकेश के शरीर के भीतर एक भी मुख्य अंग मौजूद नहीं था। दिमाग, दिल, दोनों फेफड़े, लिवर, दोनों किडनी, पेट और आंत समेत लगभग सभी जरूरी अंग पूरी तरह से गायब थे।
शव की हालत इतनी वीभत्स थी कि गर्दन से लेकर पेट के निचले हिस्से तक 22 टांके और एक कान से दूसरे कान तक सिर पर 21 टांके लगे हुए थे। शरीर के भीतर अंगों का नामोनिशान न होने के कारण भारतीय डॉक्टर भी चाहकर की मौत की असली वजह और समय का पता नहीं लगा पाए।
हत्या कर अंग तस्करी की आशंका, परिजनों ने सरकार से लगाई न्याय की गुहार
राकेश के बुजुर्ग पिता रामदेव चौहान और उनके गांव के पूर्व प्रधान घनश्याम सिंह ने रोते हुए आरोप लगाया है कि यह कोई सामान्य मौत या हादसा नहीं है। उनका आरोप है कि राकेश की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई और फिर इंटरनेशनल ऑर्गन माफिया के साथ मिलकर उनके अंगों को निकाल कर बेच दिया गया है, जिसमें वह कंपनी भी संदिग्ध है।
दुखी परिवार ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, आरोपी कंपनी पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाया जाए। फिलहाल फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियन (FSUI) ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है और चेतावनी दी है कि विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों की सुरक्षा के साथ ऐसा खौफनाक खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।












