वो सुनामी का खौफनाक मंजर ‎जिसमें 19 साल पहले हुई थी 2 लाख मौतें, ये 14 देश हुए थे प्रभा‎वित,

कहर बनकर आई थी साल 2004 की भीषण तबाही

नई दिल्ली (ईएमएस)। सुनामी का वह खौफनाक मंजर आज भी याद है जब 19 साल पहले 2 लाख मौंतें हुई ‎थी। उस दौरान बवंडर से दु‎निया के 14 देश प्रभा‎वित हुए थे। अब ‎फिर अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान बिपरजॉय का जादू ‎सिंर चढ़कर बोल रहा है। यह तूफान गुजरात के तटीय क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहा है। गुरुवार यानी आज शाम यह गुजरात के कच्छ जिले के जखाऊ पोर्ट और इससे लगते पाकिस्तान के इलाकों से टकराने जा रहा है। अनुमान है कि तट से टकराते समय तूफान की स्पीड 125 से लेकर 150 किलोमीटर तक रह सकती है। लेकिन यह कोई पहली बार नहीं है जब समुद्र अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। इससे पहले भी न जाने कितने ही तूफानों से भारत के तटीय क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है। आज से ठीक 19 साल पहले भी भारत में समुद्री तबाही का ऐसा ही मंजर देखने को मिला था। जिसे इतिहास के पन्नों में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज कर लिया गया था। साल 2004 में जब अरब सागर में सुनामी की लहरें उठी थीं ना जाने कितने ही देश प्रभावित हुए थे। इस भीषण तबाही में 2 लाख 25 हजार से भी ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

बता दें ‎कि 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के उत्तरी भाग में स्थित असेह के निकट रिक्टर पैमाने पर 9.1 तीव्रता के भूकंप के बाद समुद्र के भीतर उठी सुनामी ने भारत सहित 14 देशों में भारी तबाही मचाई थी। इसने यूं तो कई देशों में तबाही मचाई थी। लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान इंडोनेशिया, दक्षिण भारत, श्रीलंका, मालदीव्स और थाइलैंड को हुआ था। उस समय तक सुनामी की पूर्व चेतावनी जैसी कोई प्रणाली प्रचलन में नहीं थी। इसी का नतीजा था कि इस तरह की तबाही का किसी को अंदाजा भी नहीं था। साल खत्म होने वाला था तो लोग भी नए साल का जश्न मनाने के लिए भारी संख्या में तटीय क्षेत्रों में घूमने के लिए गए हुए थे। इस कारण मरने वालों की संख्या कहीं ज्यादा थी। समुद्र किनारे बने होटलों और रिसॉर्ट में बड़ी संख्या में ठहरे पर्यटकों की सुनामी ने जान ले ली थी।

उस समय 9.1 तीव्रता वाले भूकंप के कारण समुद्र में 65 फीट ऊंची लहरें उठीं। सुनामी के कारण अकेले भारत में 12 हजार 405 लोगों की मौत हुई थीं। जबकि, 3,874 लोग लापता हो गए थे। इतना ही नहीं इस तबाही में 12 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। ऊंची-ऊंची लहरों के कारण पुल, इमारतें, गाड़ि‍यां, जानवर, पेड़ और इंसान तिनकों की तरह बहते हुए नजर आए। मौत के आंकड़ों की अगर बात की जाए तो अकेले तमिलनाडु राज्य में आठ हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। वहीं, अंडमान-निकोबार में 3 हजार 515 मौते हुईं। इसके अलावा पुड्डुचेरी में 599, केरल में 177 और आंध्र प्रदेश में 107 मौतें हुईं।

सालों बाद नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड ओसियन रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस पर शोध करने के बाद पता लगाया कि इतने भयावह भूकंप और सुनामी की वजह हिमालय थी। इस शोध के नतीजे भी 2017 में प्रकाशित हुए थे। सुमात्रा भूकंप का केंद्र हिंद महासागर में 30 किलोमीटर की गहराई में रहा, जहां भारत की टेक्टोनिक प्लेट आस्ट्रेलिया की टेक्टोनिक प्लेट के बॉर्डर को टच करती है। पिछले कई सौ वर्षों से हिमालय और तिब्बती पठार से कटने वाली तलछट गंगा और अन्य नदियों के जरिए हजारों किलोमीटर तक का सफर तय कर हिंद महासागर की तली में जाकर जमा हो जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना था कि ये तलछट प्लेटों के बॉर्डर पर भी इकट्टा हो जाती हैं जिसे सब्डक्शन जोन भी कहते हैं जो भयावह सुनामी का कारण बनती हैं।

खबरें और भी हैं...