9/11 हमले की 25वीं बरसी: UNSC में अमेरिका ने दिलाई लादेन के खात्मे की याद, सामने बैठकर सुनता रहा पाकिस्तान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस दौरान अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन से लेकर अबू बकर अल-बगदादी और अयमान अल-जवाहिरी जैसे खूंखार आतंकियों के खात्मे का पूरा ब्योरा दुनिया के सामने रखा। इस बैठक का सबसे प्रमुख बिंदु यह रहा कि जब अमेरिकी प्रतिनिधि आतंकवाद के खिलाफ अपनी निर्णायक कार्रवाई और पाकिस्तान में छिपे लादेन के खात्मे की बात कर रहे थे, ठीक उसी मेज पर पाकिस्तान का प्रतिनिधि भी मौजूद था।

सुरक्षा परिषद की मेज पर आमने-सामने हुआ सच का सामना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस विशेष बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का खाका पेश किया। गौरतलब है कि पाकिस्तान इस समय सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है और उसका यह दो साल का कार्यकाल इस वर्ष दिसंबर में समाप्त हो रहा है। 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के आतंकियों द्वारा चार विमानों को हाईजैक कर न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर किए गए भीषण हमले में हजारों बेगुनाह मारे गए थे। इसी घटना को याद करते हुए अमेरिका ने आतंकवाद पर अपना कड़ा रुख दोहराया।

लादेन से बगदादी तक के खात्मे की दिलाई याद अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि वैश्विक गठबंधन और अमेरिकी अभियानों के तहत अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे संगठनों की कमर तोड़ दी गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 9/11 की साजिश रचने वाला ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के ऐब्टाबाद में छिपा हुआ था, जिसे अमेरिकी नेवी सील्स ने मई 2011 में एक गुप्त ऑपरेशन के तहत मार गिराया था। इसके अलावा उन्होंने अल-बगदादी और अल-जवाहिरी के सफाए का भी जिक्र किया। वॉल्ट्ज ने 2005 के लंदन बम धमाकों और 2014 के पेशावर आर्मी स्कूल हमले में मारे गए 130 से अधिक मासूम बच्चों की शहादत को याद दिलाते हुए कहा कि आतंकवाद ने हर जगह सिर्फ तबाही फैलाई है।

पांच साल बाद आतंकवाद पर सुरक्षा परिषद का साझा बयान सुरक्षा परिषद ने पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आतंकवाद के खिलाफ एक सर्वसम्मत साझा प्रेसिडेंशियल बयान स्वीकार किया। इस ऐतिहासिक प्रस्ताव में 9/11 हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए स्पष्ट किया गया कि किसी भी प्रकार के आतंकवाद को जायज नहीं ठहराया जा सकता। UNSC ने दो टूक कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही आतंकियों को वित्तीय मदद या किसी भी तरह का आश्रय देना संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

पाकिस्तान ने बैठक में रोया अफगानिस्तान का रोना अमेरिकी आरोपों और लादेन के जिक्र के बीच पाकिस्तान के प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने अपनी सफाई में अफगानिस्तान की सीमा से होने वाले हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान अफगानिस्तान की धरती से संचालित हो रहे आतंकवाद के कारण 4,700 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीटीपी (TTP), बीएलए (BLA) और मजीद ब्रिगेड जैसे संगठन अफगान जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान पर लगातार हमले कर रहे हैं।

 

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