
फाफामऊ /प्रयागराज।
फाफामऊ स्थित गंगा नदी में लापता मनीष की लाश मिलने के पहले पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित राजाबाबू से पूछताछ की तो उसने कई बातें बताईं। उसने कहा कि कछार की जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद फरवरी में ही शुरू हो गया था। मिथुन और मनीष को कहा गया था कि आगे से वह यहां खेती न करें, वरना अंजाम ठीक नहीं होगा लेकिन दोनों नहीं माने और कद्दू की खेती कर डाली। इधर, कुछ दिन पहले जब इसी बात को लेकर दोनों को टोका गया तो उन लोगों ने भी धमकाया। 16 दिसंबर की रात आशीष, ननके, मनजीत और आकाश के साथ मिलकर कछार में ही जमकर शराब पी। इसके बाद तमंचा, चापड़, लाठी-डंडा और हसिया लेकर वह दोनों पर हमला करने निकल पड़े।
भिड़ गया था मनीष, इसलिए मार डाला
गंगा तट से कुछ दूर पर ही मनीष और मिथुन हमलावरों को मिल गए। यहां विवाद शुरू हुआ तो मनीष भी तैश में आ गया और भिड़ गया। मिथुन भी भिड़ने की कोशिश करने लगा, जिस पर मिथुन को गोली मार दी गई। वह जमीन पर गिरा तो मनीष को घसीटकर गंगा नदी के किनारे लाया गया। यहां धारदार हथियार से उस पर वार करने के साथ ही उसे गोली मार दी गई। वहीं घाट से कुछ दूर से बड़ा पत्थर लाकर उसके शव के साथ रस्सी से बांध दिया गया, ताकि शव नदी में उतरा न सके। इसके बाद नाव से ले जाकर लाश को नदी के बीचो-बीच फेंक दिया गया।
जंजीर और कारतूस कब गिरा पता नहीं
राजाबाबू ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह और उसके साथी शराब के नशे में धुत थे। घाट पर कब मनीष की जंजीर गिरी, यह नहीं पता। कारतूस भी कब वहां गिर गया, इस बारे में भी उसे कुछ नहीं मालूम।
यह थी घटना
सोरांव थाना क्षेत्र के फाफामऊ के कछार में 16 दिसंबर की रात मऊआइमा थाना क्षेत्र के गदियानी गांव निवासी मिथुन पुत्र रामफेर अपने दोस्त पुराना फाफामऊ निवासी मनीष कुमार पुत्र स्व. अच्छेलाल के साथ फसल की रखवाली कर रहा था। उसी समय शिवकुटी थाना क्षेत्र के बारूदखाना निवासी आशीष, ननके, राजाबाबू, मनजीत और आकाश वहां पहुंचे। मिथुन के गर्दन में गोली मारी और मनीष की हत्या कर शव को गंगा नदी में फेंक दिया था।












