नासिक/संभाजीनगर: महाराष्ट्र के नासिक में बहुचर्चित आईटी कंपनी टीसीएस (TCS) से जुड़े धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रही मुख्य महिला आरोपी निदा खान को नासिक पुलिस ने छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया है। निदा की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे रैकेट की कड़ियों के और खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
गर्भावस्था का बहाना और कानूनी दांवपेच भी नहीं आए काम
निदा खान की गिरफ्तारी के पीछे एक लंबा घटनाक्रम रहा है। इससे पहले अप्रैल के महीने में निदा के वकीलों ने कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए 18 अप्रैल को एक डॉक्टर के माध्यम से यह बयान भी दिलाया गया था कि निदा खान गर्भवती है और उसे बेड रेस्ट की सलाह दी गई है। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और एसआईटी (SIT) की जांच के आगे उसका यह ‘मेडिकल कार्ड’ फेल हो गया।
4 मुख्य आरोपी पहले से ही सलाखों के पीछे
इस मामले में कानूनी कार्रवाई तेजी से चल रही है। पिछले मंगलवार को नासिक की एक अदालत ने इसी मामले के चार अन्य प्रमुख आरोपियों—रजा रफीक मेमन, तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश एजाज शेख और शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी—को 18 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब निदा खान से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस पूरे धर्मांतरण और उत्पीड़न के खेल में और कितने लोग शामिल थे।
क्या है पूरा विवाद? बीपीओ की आड़ में चल रहा था ‘डर्टी गेम’
यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब नासिक स्थित इस मल्टीनेशनल कंपनी की महिला कर्मचारियों ने अपने ही सहकर्मियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। शिकायत के अनुसार, फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच कार्यालय परिसर के अंदर महिलाओं का यौन उत्पीड़न किया गया और उन पर धर्म बदलने के लिए मानसिक दबाव बनाया गया।
20 से ज्यादा शिकायतें और एसआईटी की जांच
इस सनसनीखेज मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) को हेल्पलाइन नंबर पर अब तक 20 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। जांच में सामने आया है कि:
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आरोपियों द्वारा कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत किया जाता था।
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अब तक कुल 12 लिखित शिकायतें दर्ज की गई हैं और 9 एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी हैं।
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पुलिस अब तक कुल 7 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
चुनौती: फोन पर शिकायतें पर सामने आने से डर रहे पीड़ित
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हेल्पलाइन नंबर पर कई लोग आपबीती सुना रहे हैं, लेकिन सामाजिक लोकलाज या डर के कारण औपचारिक रूप से सामने आकर बयान दर्ज कराने में हिचकिचा रहे हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि पीड़ितों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।














