दैनिक भास्कर एक्सक्लूसिव : डिजिटल इंडिया में डिजिटल सूदखोरों की भरमार!

रामअवतार उपाध्याय प्रभारी

आजमगढ़ कभी ओटीपी तो कभी एटीएम कार्ड से पैसे निकलने के मामले काफी सुनने में आ रहे थे लेकिन अब डिजिटल इंडिया में डिजिटल सूदखोरों द्वारा पैसे देकर मोटे ब्याज की रकम वसूली जा रही है जी हां 21वीं सदी में है हर चीज डिजिटल होती जा रही है तो सूदखोरों ने डिजिटल तरीके से लोन बांटकर रातो रात धनाढ्य बनने का सपना देख रहे हैं हम नहीं आजमगढ़ के साइबर सेल एक्सपर्ट मनीष सिंह ने बड़ा खुलासा किया है दैनिक भास्कर से मनीष सिंह ने बातचीत में बताया कि सोशल मीडिया पर तरह तरह के फर्जीवाड़े ढंग से लोन देने की ऐड चल रहे हैं जो मिनटों में आधार कार्ड से लिंक कराने पर हजारों रुपए लोन दे दे रहे हैं लेकिन उसके ब्याज इतने अधिक लिए जा रहे हैं जिससे कि चुकाने वाला व्यक्ति अपनी जान तक गंवा दे रहा है लेकिन ब्याज चुका पाने में सफलता नहीं मिल पा रही है .

मनीष सिंह ने बताया कि तरह-तरह के प्रलोभन देकर लोगों के ऐप द्वारा पूरे पारिवारिक एवं रिश्तेदारों की डिटेल यह डिजिटल शुद्ध कोर अपने पास एकत्रित कर ले रहे हैं और समय अनुसार इनके मनमाफिक ब्याज ना देने पर यह नातेदार को फोन कर लोगों को मानसिक प्रताड़ना कर रहे हैं जिससे ऊब कर अपनी जान गवाने को लोग मजबूर हो रहे हैं तस्वीरों में आप देख सकते हैं कितनी आसानी से कर्ज देने की बात कही जा रही है लेकिन कर्ज लेने के बाद कर चुका पाने में काफी मशक्कत हो रही है इसलिए ऐसे लोगों से आप सतर्क और संभल कर रहे हैं बिना सोचे विचारे कोई भी ऐप डाउनलोड ना करें.

प्रायः यह शिकायत मिल रही है कि लोग तुरंत और ज्यादा लोन पाने के लिए मोबाइल ऐप्स पर रजिस्ट्रेशन करके लोन ले रहे है। मोबाइल ऐप्स आधारित वित्त कंपनी से लोन लेने से पहले सावधान रहें, ये ऐप आरबीआई द्वारा अनुमोदित नहीं होते है। ये ऐप आपके गोपनीय डेटा (जैसे कांटेक्ट, कॉल डिटेल, मैसेज डिटेल) को चोरी करके और EMI रिकवरी के नाम पर ऑनलाइन भी धमका सकते हैं और आपसे मूलधन के कई गुना पैसा व्याज के रूप में ले सकते हैं। हमेशा RBI द्वारा अनुमोदित बैंकिंग और वित्तीय सेवा कंपनियों से ही लोन ले।

मोबाइल एप पर लोन देने वाली कंपनियों के धांधली करने के तरीके
1- जल्दी और आसान तरीके से लोन देने का वादा करना
2- कम ब्याज दर पर अधिक लोन देना
3- अतिरिक्त छुपे हुए शुल्क का डिटेल नहीं बताना
4- लोन दिए हुए रकम की जबरन वसूली करना

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