
- क्या डिंपल यादव कर पायेंगी कमाल, उपचुनाव का परिणाम करेगा फैसला
भास्कर समाचार सेवा मैनपुरी। मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर 1967 में जसवंतनगर सीट से विधायक बनने के साथ शुरू हो गया था। लेकिन समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव को असली पहचान मैनपुरी ने ही दिलाई। वर्ष 1996 में पहली बार मैनपुरी लोकसभा सीट से जीतकर ही मुलायम सिंह यादव रक्षामंत्री बने। इसके बाद एक नहीं बल्कि सैफई परिवार के कई सदस्यों ने मैनपुरी की सीढ़ी के सहारे सियासत की सीढ़ियां चढ़ीं। मैनपुरी की ये सीढ़ी आज भी सैफई परिवार के साथ है या नहीं, इसका फैसला उपचुनाव का परिणाम ही करेगा।
ज्ञात हो कि मैनपुरी को मुलायम सिंह यादव की कर्मभूमि यूं ही नहीं कहा जाता है। यहां से सैफई परिवार के सदस्यों का राजनीतिक सफर बुलंदियों पर पहुंचा। 1996 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर इस सफर की शुरुआत की थी। ये वही जीत थी, जिसने मुलायम को देश के रक्षामंत्री की कुर्सी दिलाई। मैनपुरी की सीढ़ी के सहारे ही 2004 के उपचुनाव में मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव पहली बार महज 27 साल की उम्र में मैनपुरी से सांसद चुने गए। ये सैफई परिवार की दूसरी पीढ़ी थी जो मैनपुरी के रास्ते संसद तक पहुंची थीं।
पौत्र तेजप्रताप यादव ने
वर्ष 2014 के उपचुनाव में सांसद बनकर सैफई परिवार की तीसरी पीढ़ी के रूप में मैनपुरी की राजनीति में कदम रखा। मुलायम सिंह यादव द्वारा मैनपुरी सीट छोड़ने के बाद उन्होंने अपने पौत्र तेजप्रताप यादव को मैदान में उतारा था । तेजप्रताप यादव की उम्र तब 26 वर्ष की थी। तेजप्रताप ने भी मैनपुरी लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और संसद पहुंचे। अब मुलायम सिंह के निधन के बाद उनकी पुत्रवधू डिंपल यादव मैदान में हैं। वे पहले भी कन्नौज से दो बार सांसद रह चुकी हैं। मुलायम सिंह के निधन के बाद भी सैफई परिवार के लिए मैनपुरी सीट सियासत की सीढ़ी का काम करती है या नहीं इसका निर्णय उप चुनाव का परिणाम ही करेगा।
2015 में भतीजी संध्या यादव बनीं जिला पंचायत अध्यक्ष
सैफई परिवार के बेटे और बहुओं के तो राजनीति में आपने खूब चर्चे सुने होंगे, लेकिन सैफई परिवार की बेटी की राजनीति से कम ही लोग वाकिफ हैं। यहां भी मैनपुरी ने अपनी अहम भूमिका निभाई। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन और मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव ने मैनपुरी से ही राजनीति में कदम रखा। वे 2015 में मैनपुरी से ही पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। पूरे पांच साल वे पद पर रहीं। हालांकि 2021 में उन्होंने भाजपा का दामन थामकर जिला पंचायत चुनाव लड़ा और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
अखिलेश ने करहल से लड़ा विधानसभा चुनाव
अखिलेश यादव सांसद तो कई बार रहे, लेकिन 2022 के चुनाव में जब अखिलेश ने विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया तो उन्हें भी मैनपुरी की ही याद आई। उन्होंने मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीते भी। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं।













