ब्रेन ट्यूमर का इलाज पूरी तरह से संभव है: डॉ राहुल गुप्ता

भास्कर समाचार सेवा नोएडा फोर्टिस हॉस्पिटल
ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही अक्सर लोग इसे लाइलाज बीमारी मान लेते हैं और मौत निश्चित है ऐसा सोचकर इसका ईलाज ही कराते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है आजकल की एक से एक नई पद्धतियों और आधुनिक उपकरणों ने चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला दी हैं। ब्रेन ट्यूमर का भी अब इलाज किया जा सकता है और रोगी अपनी जिंदगी नार्मल तरीके से जी सकते हैं। इन्हीं सब बातों को लेकर फोर्टीज अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन एवं विभागध्यक्ष डॉ राहुल गुप्ता ने “दैनिक भास्कर ” से जीतेन्द्र शर्मा के साथ विस्तृत चर्चा की ——-
प्र – डॉ साहब क्या इन दिनों वाकई ब्रैन ट्यूमर के मामले बढ़ रहे हैं ??
उ – नहीं ऐसा नहीं है पहले हमारे पास ज्यादा तकनीकी नहीं थी इसलिए लोगों को बीमारी का पता नहीं चल पाता था। लेकिन आजकल एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उम्दा तकनीकी आ जाने के बाद डिडैक्शन ज्यादा हो रहा है जिसकी वजह से ऐसा लगता है कि ब्रेन ट्यूमर के मामले अधिक हो गए हैं। पहले यह भ्रान्ति थी कि अगर किसी को ब्रेन ट्यूमर है तो उसकी मृत्यु निश्चित है इसलिए लोग इसका इलाज कराते ही नहीं थे। आज भी हम ऐसे लोगों को जानते हैं जिनको पिछले 7-8 साल से ब्रेन ट्यूमर है और वह उसका इलाज ही नहीं करा रहे हैं। मैं कह सकता हूं कि 90 प्रतिशत पेसेंट नोर्मल लाइफ लीड कर सकते हैं चाहे वो कितनी भी हो? 2 साल 5 साल या 10 साल। इसलिए लोग आते हैं इलाज के लिए। हम भी कोनफिडैंट होते हैं।
प्र – क्या अब आप कह सकते हैं कि ब्रेन ट्यूमर का इलाज पूरी तरह से संभव है ??
उ- जी बिल्कुल, सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है डाइग्नोसिस, जिसमें एमआरआई की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। आजतक हर दिन एमआरआई में इतना ज्यादा नई नई चीजें डेवलप हो रहीं हैं नई नई सीक्वैसिस आ रही हैं कि एमआरआई की नई तकनीक से अब ब्रेन ट्यूमर को नजदीकी से देखा और पहचाना जा सकता है। प्लेन में हमें उसकी स्थित का पता चलता है कि ट्यूमर कहां है किस स्थित में है। जबकि काॅन्टरैस एमआरआई में ऊसकी और अधिक साफ छवि पता चलती है। इलाज के समय विशेषकर आपरेशन के समय हमें दिमाग और ब्रेन ट्यूमर की सटीक जानकारी मिल जाती है जैसे कि किस तरह का है कितना बड़ा है कैंसरस है या नोन कैंसरस है अथवा कोई टीवी की गांठ तो नहीं है इत्यादि और उसका उतना ही प्रभावी इलाज हम कर पाते हैं। फलोरोसिस एक दवाई है जिससे कि हम सही मार्किंग कर पाते हैं कि ट्यूमर किस प्रकार का है। ब्लैसपैरिटी कितनी है यह भी पता चल पाता है ?
प्र- किस प्रकार के अस्पताल में इलाज कराना चाहिए ??
उ – जिसमें आपरेशन थियेटर से लेकर एमआरआई और सीटी स्कैन की उच्च स्तरीय सुविधा हो। आईसीयू केयर बहुत अच्छी होनी चाहिए। वैंटीलेटर की सुविधा भी अच्छी होनी चाहिए। जिससे ट्यूमर के इलाज में मदद मिलती है। उच्च क्षमता वाले माइक्रोस्कोप जैसी सुविधाएं होनी अनिवार्य है। आपरैशन के दौरान ज्यादा रक्त ना बहे इसके लिए स्ट्रा केयर की भी आवश्यकता होती है।
प्र – ट्यूमर कितने तरह का होता है और इलाज की पद्धति कौन कौन सी है ?
उ – उदहारण के लिए एक ट्यूमर गर्दन के पीछे वाले हिस्से में होता है। उसकी जांच के बाद हम उसका इलाज नांक के रास्ते से करते हैं। उसमें हम ब्रेन को बिल्कुल भी टच नहीं करते हैं। इसी प्रकार के अन्य तरीके भी बड़े अस्पतालों में उपलब्ध हैं। कुछ ट्यूमर को इंडोस्कोप द्वारा भी आसानी से निकाल दिया जाता है।
प्र – डॉ साहब ट्यूमर होने के मुख्य लक्षण क्या हैं ??
उ – सिर दर्द का लगातार होना और अगर किसी को दिखाई देने में सोने में दिक्कत आ रही है या शरीर के एक हिस्से मे सुन्न है उल्टियों जैसा मन हो रहा है या फिर दौरे पड़ रहे हैं तो यह ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। जैसे ही ये लक्षण दिखाई देने लगे तो सबसे पहले अपने फैमिली डॉक्टर से मिलें और अगर वो सही सलाह नहीं दे रहा है तो एक न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें जो सबसे पहले एमआरआई कराएगा। एमआरआई बिल्कुल भी हार्मफुल नहीं है और यह ट्यूमर होने या ना होने की सटीक जानकारी देता है। उसके बाद उसका इलाज किया जा सकता है और व्यक्ति अपनी सामान्य जिंदगी जी सकता है।
डॉ राहुल क्या ब्रेन ट्यूमर निकालने के बाद भी ट्यूमर दोबारा होने का खातरा रहता हैं?
देखिए मे बता दूँ की ब्रेन का ट्यूमर बहुत कम होता हैं की शत प्रतिशत निकल पाता हैं
बहुत से ट्यूमर ऐसे होते हैं जो ज्यादा ग्रो नहीं करते कुछ ऐसे ट्यूमर होते हैं हो ज्यादा ग्रो करते हैं जो ट्यूमर ग्रो नहीं करते तो हम उसकी बार- बार एम आर आई कराते हैं जो ट्यूमर ज्यादा ग्रो करते हैं, उनकी रेडियो थेरेपी, कीमो थेरेपी यार बार – बार एम आर आई कराते हैं हर तीन महीने के अंतर पर ताकि अगर ट्यूमर रिकर हो तो हम उसे निकाल सके |
डॉ साहब क्या ब्रेन ट्यूमर होने का कोई मुख्य कारण हैं?
मे आपको बता दूँ की ब्रेन ट्यूमर हमारे शरीर मे 99.9% बिना किसी कारण से होता हैं इसका ऐसा कोई ख़ास कारण नहीं हैं कुछ सिनड्रॉम्स होते जिसमे ब्रेन ट्यूमर एसोसीएट होता हैं,ओर ऐसा भी पॉइंट वन केसो मे देखा गया हैं पर उससे भी बचाव का कोई मेज़र तरीका नहीं हैं इसके आलावा मे बता दूँ की किसी भी ट्यूमर से बचाव का कोई तरीका नहीं हैं हाँ जल्दी जाँच करके जल्दी इलाज़ करा के हम इससे बच सकते हैं
ये सारी जानकारी दी डॉ राहुल गुप्ता ने जो कि फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के वरिष्ठ स्पाइन एवं न्यूरोसर्जन व डायरेक्टर ऑफ़ हैड ऑफ़ डिपार्टमेंट हैं

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