
संसद-संकल्प के 60 साल बीतने पर बीटीएसएस ने की नई पहल
लखनऊ। भले ही देश में लोग 14 नवंबर को नेहरू जयंती के रूप में मनाते आए हों लेकिन तिब्बत मुक्ति के एक संगठन ने इसे अक्साई चिन मुक्ति संकल्प दिवस के रूप में मनाया। संगठन महिला विभाग की राष्ट्रीय महामंत्री डॉ यज्ञा जोशी ने कहा कि इसके साथ ही हम जनता को भारतीय संसद के उस संकल्प की याद दिला रहे हैं जो इस दिन 1962 में चीन युद्ध के दौरान लिया गया था।
गुजरात के अहमदाबाद से डॉ जोशी ने जारी बयान में कहा कि वर्ष 1962 में 20 अक्टूबर को चीन ने भारत पर हमला कर दिया था। हिंदी-चीनी भाई-भाई कहते हुए चीन ने भारत पर धोखे से हमला किया और लद्दाख के क्षेत्र में लगभग 40 हजार वर्ग किलोमीटर की हमारी भूमि अक्साई चिन को उसने कब्जे में ले लिया। इस हमले से पूरा देश आहत था। इस बीच, 8 नवंबर 1962 को तत्कालीन पीएम नेहरू ने संसद में प्रस्ताव रखा था कि चीन के चंगुल में इस भूमि का पुरा भाग वापस लेकर रहेंगे। लोकसभा व राज्यसभा में इस प्रस्ताव के सर्वसम्मति से पारित होने का दिन 14 नवंबर का ही था। इस प्रकार सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव संकल्प के रूप में सामने आया लेकिन दुखद यह रहा कि उसके बाद आज 60 साल बीतने के बाद भी न जाने कितनी सरकारें आईं और गईं लेकिन वह अक्साई चिन आज भी चीन के कब्जे में है इसलिए हम संसद के उस संकल्प को जनता के बीच ले जाना चाहते हैं कि वह इस मुद्दे पर जागे और सरकार को जगाए ताकि हम राष्ट्रीय सुरक्षा और गौरव के उस मुद्दे पर एक होकर अक्साई चिन को वापस ले सकें। डॉ जोशी ने कहा कि हमारे भारत तिब्बत समन्वय संघ ने इसका बीड़ा उठाया है, इस वर्ष लगभग 200 से अधिक सांसदों को इस संबंध में प्रत्यक्ष ज्ञापन भी हमने दिया कि वह इस मुद्दे पर केंद्र की सरकार को जगाएं। सोमवार को 60 साल पूरे हो गए। आश्चर्य है कि आज के सांसद इस संकल्प को जानते तक नहीं हैं इसलिए लगा कि अब जनता कोजगाना होगा और इसीलिए बीते सोमवार को संगठन ने पूरे देश में इसे अक्साई चिन मुक्ति संकल्प दिवस के रूप में मनाया।
इसका प्रभाव यह दिखा, जब हजारों लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस दिवस को जानने में उत्सुकता दिखाई। अब हम सब प्रतिवर्ष 14 नवंबर को इसे इसी तरह मनाएंगे और तब तक मनाएंगे जब तक कि अक्साई चिन हमें वापस नहीं मिल जाता। उन्होंने बताया कि संघ के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत के मार्गदर्शक बाबा महाहंस जी महाराज, मध्यप्रदेश से महिला विभाग की राष्ट्रीय महामंत्री सुश्री राजो मालवीय, धर्म एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण प्रभाग के राष्ट्रीय सह संयोजक किशोर बाल्मीकि, छत्तीसगढ़ के प्रांत अध्यक्ष कौंतेय जायसवाल, प्रांत संयोजक (पर्यावरण प्रभाग) वसंत जायसवाल, पटना से उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष (युवा विभाग) प्रीतेश रंजन सिंह, कुरुक्षेत्र से उत्तर क्षेत्र की महिला विभाग की महामंत्री डॉ रूक्मेश चौहान, दिल्ली से उत्तर क्षेत्र महिला विभाग की अध्यक्ष संध्या सिंह, नोएडा के आईटी एक्सपर्ट पंकज, इग्नू की प्रो वाइस चांसलर व महिला विभाग की राष्ट्रीय प्रभारी प्रो सुमित्रा कुकरेती, युवा विभाग की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य कामिनी राजपूत, रोहिलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व डीन व संघ के राष्ट्रीय मंत्री प्रो बी आर कुकरेती, सौराष्ट्र प्रांत अध्यक्ष (महिला विभाग) चंद्रिकाबेन चौहान, गोरक्ष प्रांत के अध्यक्ष श्रीकांत मणि त्रिपाठी, पश्चिम महाराष्ट्र के प्रांत अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पाठक, जम्मू-कश्मीर प्रांत के युवा विभाग के लक्ष्य, कानपुर से युवा विभाग के राष्ट्रीय मंत्री तेजस चतुर्वेदी, रांची से प्रांत अध्यक्ष (महिला विभाग) किरण मिश्रा, अवध प्रांत महामंत्री मुकेश तिवारी, मूल कार्यकारिणी राष्ट्रीय मंत्री डॉ आर एच लता और दिल्ली प्रांत मुख्य संयोजक रॉबिन शर्मा आदि ने इस कार्य में प्रत्यक्ष योगदान किया।








