अभिनव के मजबूत इरादों से सवर जाएगी अब दिव्यांग्यों की जिंदगी, मशीन देख खिल उठे बेसहारों के चेहरे

अभिनव शेखर वशिष्ट ने अपनी पढ़ाई जयपुर से की और मैकेनिकल इंजीनियरिंग आईआईआईटी जबलपुर मध्य प्रदेश से पूरी की। अभिनव जब सिक्स्थ सेमेस्टर में थे तो तब उन्होंने दिवांग्यों के लिए कुछ करने की ठानी हालांकि उस वक्त हायर एकेडमिक्स के लिए USA जाना था पर उस सफर को न चुनकर खुद का स्टार्टअप शुरु करने के तरफ जुट गए ।

2016 वो साल था जब अभिनव ने अपना खुद का स्टार्टअप Sonant कंपनी रूप में शुरु किया। Sonant कंपनी के फाउंडर अभिनव शेखर वशिष्ट ने खुद का स्टार्टअप शुरु किया, ये स्टार्टअप जो सुन नहीं सकते और बोल नहीं सकते उनके लिए है, सोनांत एक ऐसी मशीन बनाई जो इन बच्चों को नॉर्मल लाइफस्टाइल देने में मदद करे, ये मशीन हैंड ग्लव्स की तरह हैं जिसमें बटंस होते हैं और वो रिसीवर की तरह काम करते हैं।

अभिनव ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी को पीएम मोदी ने खूब सराहा और ये न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी इस मशीन की चर्चा है । अभिनव ने ये सफर अकेले शुरू किया था लेकिन आज 15 लोगो की टीम और 35% दिवांग्यों व्यक्ति जुड़े हुए है। अभिनव ने बताया ये सफर आसान नहीं था बहुत मुस्किलो और बातों का सामना करना पड़ा लेकिन जब जज़्बा होता है मजबूत होता है इरादा और पक्का हो जाता है ।

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