
-अविभाजित हिन्दू परिवार से मिली रकम नहीं आती टैक्स के दायरे में
नई दिल्ली (ईएमएस)। इनकम टैक्स आपकी पूरी इनकम पर लगता है। इसमें केवल सैलरी ही शामिल नहीं है। सैलरी के अलावा बचत से आने वाले ब्याज, घर से हो रही कमाई, साइड बिजनेस, कैपिटल गेन्स जैसी कई चीजें शामिल हैं। लेकिन कुछ स्रोत ऐसे भी हैं, जहां से होने वाली आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है।
खेती से होने वाली आय के अलावा कई और ऐसी इनकम हैं जिन्हें टैक्स दायरे से बाहर रखा गया हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10 में टैक्स छूट वाली इस तरह की आमदनी के बारे में जिक्र है। अविभाजित हिन्दू परिवार से मिली रकम या विरासत के रूप में हुई आमदनी को इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है। इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10(2) के तहत इस तरह की आमदनी टैक्स के दायरे से बाहर है।
इस सेक्शन में कहा गया है परिवार की आमदनी, अचल संपत्ति से कमाई या अविभाजित हिन्दू परिवार को पुश्तैनी संपत्ति से कमाई पर आयकर नहीं चुकाना होगा। आपके बचत खाते (सेविंग अकाउंट) में मौजूद रकम पर हर तिमाही में ब्याज मिलता है। इनकम टैक्स कानून के हिसाब से यह आपकी आमदनी है। इस पर आप इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80टीटीए के हिसाब से आयकर में छूट हासिल कर सकते हैं। अगर बचत खाते पर ब्याज सालाना 10,000 रुपये से ज्यादा है तो अतिरिक्त रकम पर आपको इनकम टैक्स देना पड़ेगा। अगर कोई कर्मचारी केंद्र या राज्य सरकार के लिए काम करता है तो उसे मिलने वाली ग्रैच्युटी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।
हालांकि, प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले एंप्लॉयी को जब टोकन ऑफ एप्रीसिएशन मिलता है तो इसके लिए टैक्स का नियम अलग है। अगर किसी छात्र को कोई छात्रवृत्ति मिलती है या कोई अवार्ड मिलता है जिससे वह पढ़ाई का खर्च चला रहा है तो इस पर इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10 (16) के तहत आयकर से छूट है। इसमें रकम की कोई सीमा नहीं है। इनकम टैक्स कानून के नियम 2बीए के तहत वीआरएस के रूप में मिली पांच लाख रुपये तक की रकम टैक्स फ्री है।














