
अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि गायब होने के हाई-प्रोफाइल मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रडार पर अब पुलिस के वायरलेस विभाग के एक रसूखदार अधिकारी अर्जुन देव आ गए हैं। जांच में सामने आया है कि अर्जुन देव के पास ही उस अति-सुरक्षित काउंटिंग रूम की तीसरी आंख यानी सीसीटीवी (CCTV) निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी थी, जहां रामलला के दरबार में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे के नोटों की गिनती होती थी। अब नोट गायब होने की इस सनसनीखेज वारदात में उनकी भूमिका और घोर लापरवाही की गहनता से जांच की जा रही है।
एसआईटी की इस कार्रवाई के बाद से राम मंदिर प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। जांच टीम इस बात का पता लगाने में जुटी है कि सुरक्षा के इतने पुख्ता इंतजामों और कैमरों की निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी रकम कैसे पार हो गई।

सीसीटीवी छोड़ राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामों में दखल देते थे अफसर
एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वायरलेस अधिकारी अर्जुन देव सिर्फ अपनी मुख्य ड्यूटी यानी कैमरों के जरिए निगरानी रखने तक ही खुद को सीमित नहीं रखते थे। वह राम मंदिर ट्रस्ट के कई अंदरूनी और प्रशासनिक कार्यों में भी अपनी हैसियत से ज्यादा दखलंदाजी करते थे। मंदिर परिसर में आने वाले वीवीआईपी (VVIP) मेहमानों को विशेष दर्शन कराने से लेकर परिसर की अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को अपने हाथ में लेने में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। जांच एजेंसी का साफ मानना है कि अपनी मूल जिम्मेदारी को छोड़कर इस अतिरिक्त दखल और लापरवाही की वजह से ही सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी सेंध लगी और चोरों के हौसले बुलंद हुए।
17 साल से एक ही जगह जमे हैं साहब, हर बार रुक जाता था ट्रांसफर ऑर्डर
इस पूरे मामले और एसआईटी रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू अर्जुन देव की अयोध्या में रहस्यमयी तरीके से हुई बेहद लंबी तैनाती को लेकर है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर वह साल 2009 से लगातार यानी पिछले 17 वर्षों से अयोध्या में ही जमे हुए हैं। इस लंबे सेवाकाल के दौरान पुलिस मुख्यालय से कई बार उनके ट्रांसफर के कड़े आदेश जारी किए गए, लेकिन हर बार कोई न कोई जादुई चाबी घूमती थी और उनका तबादला रुकवा दिया जाता था। हद तो तब हो गई जब हाल ही में राजधानी लखनऊ के पुलिस मुख्यालय से जारी हुआ उनका एक ताजा ट्रांसफर ऑर्डर भी रहस्यमयी ढंग से रद्द हो गया। एसआईटी अब इस बात की कुंडली खंगाल रही है कि आखिर ऐसी कौन सी महाशक्ति थी, जिसके दम पर वह इतने संवेदनशील जिले में इतने लंबे समय तक एक ही कुर्सी पर जमे रहे।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत बड़े पदाधिकारियों से थे बेहद करीबी संबंध
एसआईटी की गोपनीय रिपोर्ट में इस बात का भी साफ उल्लेख है कि अर्जुन देव के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई अन्य बड़े और रसूखदार पदाधिकारियों से बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध हैं। सूत्रों का दावा है कि इन्हीं हाई-प्रोफाइल और रसूखदार संबंधों की बदौलत उनका ट्रांसफर ऑर्डर हर बार रद्दी की टोकरी में चला जाता था। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि सुरक्षा और निगरानी जैसे अति-संवेदनशील पद पर बैठे किसी भी अधिकारी का मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों में जरूरत से ज्यादा दखल देना सुरक्षा मानकों के पूरी तरह खिलाफ है।
टिन्नू यादव और अर्जुन देव पर अब होगी बड़ी कानूनी कार्रवाई
राम मंदिर में आस्था के चढ़ावे पर डाका डालने के इस मामले में अब कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे खेल के मुख्य किरदारों में शामिल टिन्नू यादव और अब रडार पर आए वायरलेस अधिकारी अर्जुन देव, दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। एसआईटी की इस रिपोर्ट के बाद शासन स्तर पर दोनों के खिलाफ बेहद सख्त और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जल्द ही इस मामले में कुछ और चौंकाने वाली गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।













