ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ट्रंप की एंट्री, भड़के पुतिन…अमेरिका को दी सख्त चेतावनी

नई दिल्ली : ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने वाला संदेश अब वैश्विक तनाव का कारण बनता नजर आ रहा है. ट्रंप के बयान के बाद रूस खुलकर अमेरिका के खिलाफ सामने आ गया है. रूस ने न सिर्फ अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है, बल्कि ईरान पर किसी भी नए हमले की धमकी को पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है. मॉस्को का कहना है कि वॉशिंगटन की यह नीति ईरान की संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप है और इससे मध्य पूर्व के हालात और अधिक विस्फोटक हो सकते हैं.

रूस ने अमेरिका पर लगाया दखलअंदाजी का आरोप 

आपको बता दें कि रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में अमेरिका की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि ईरान की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. मंत्रालय के मुताबिक, मौजूदा हालात पहले से ही बेहद संवेदनशील हैं और ऐसे में किसी भी तरह की सैन्य धमकी या उकसावे भरी बयानबाजी पूरे क्षेत्र को युद्ध की ओर धकेल सकती है. रूस ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान पर नए सिरे से हमला करने की बात न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा…
रूस के बयान में जून 2025 की घटनाओं का विशेष उल्लेख किया गया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो ताकतें जून 2025 की तरह बाहरी प्रभावों के जरिए ईरान में अस्थिरता फैलाने की सोच रही हैं, उन्हें इसके गंभीर परिणामों को समझना चाहिए. बयान में इशारों-इशारों में कहा गया कि ऐसे प्रयासों का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा इसकी चपेट में आ सकता है.

ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चला युद्ध
गौरतलब है कि जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चला भीषण युद्ध हुआ था. इस संघर्ष में अमेरिका भी इजरायल के समर्थन में सक्रिय भूमिका में था. युद्ध के दौरान ईरान को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन संघर्ष के बाद ईरानी नेतृत्व ने इसे अपनी दृढ़ता के रूप में पेश किया. उस समय ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के प्रति जनता का भरोसा कुछ हद तक मजबूत हुआ था.

दिसंबर में बदला माहौल, सड़कों पर उतरी जनता
हालांकि यह भरोसा ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका. दिसंबर आते-आते महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक दमन से नाराज जनता सड़कों पर उतर आई. देखते ही देखते ईरान में विरोध प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी रूप ले गए. सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त कदम उठाए, जिससे हालात और बिगड़ गए. रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है.

प्रदर्शनकारियों से विरोध जारी रखने की अपील
इन्हीं हालात के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से विरोध जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि “मदद आ रही है.” ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस रूप में होगी. इस बयान को ईरान और उसके सहयोगी देश अमेरिका की सीधी दखलअंदाजी के रूप में देख रहे हैं.

वैश्विक चिंता और कूटनीतिक चुनौती
रूस का मानना है कि अमेरिका की इस नीति से हालात और बिगड़ सकते हैं. मॉस्को ने चेतावनी दी है कि अगर सैन्य रास्ता अपनाया गया तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुकाने को मजबूर हो सकती है. ऐसे समय में कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन ट्रंप के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता और अनिश्चितता पैदा कर दी है.

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