राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला: तिरुपति मॉडल पर होगी CEO की नियुक्ति, प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में बनी हाई-लेवल कमेटी

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रामलला के चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद सोमवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक संपन्न हुई। राम जन्मभूमि परिसर के भीतर स्थित गेस्ट हाउस में दोपहर 3:15 बजे शुरू हुई यह आपातकालीन बैठक करीब तीन घंटे तक चली, जिसमें मंदिर के भावी प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। इस बैठक में सबसे बड़ा कदम तिरुपति बालाजी मंदिर के कुशल और आधुनिक प्रबंधन मॉडल के आधार पर एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को लेकर उठाया गया है। ट्रस्ट ने नए सीईओ के चयन के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

देश के दिग्गज न्यायविद और सेना के पूर्व अधिकारी चुनेंगे नया CEO

ट्रस्ट की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नवगठित तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय चयन समिति में न्यायपालिका और भारतीय सेना के बेहद अनुभवी और प्रतिष्ठित अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस विशेष समिति की अध्यक्षता देश के जाने-माने सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली करेंगे। उनके साथ समिति में दो अन्य महत्वपूर्ण सदस्य— सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सुरेश हावड़े शामिल किए गए हैं। यह शक्तिशाली और निष्पक्ष समिति देश के सबसे योग्य प्रशासनिक उम्मीदवारों की स्क्रूटनी करेगी और सीईओ पद के लिए उपयुक्त नामों की सिफारिश अंतिम मंजूरी के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के समक्ष रखेगी।

चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव

इससे पहले, दानपात्रों से चढ़ावा चोरी होने के गंभीर आरोपों के बाद, राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे और ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए इस्तीफे को ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। मैराथन बैठक समाप्त होने के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में मंदिर के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृष्ण मोहन को मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव (Interim General Secretary) की अतिरिक्त और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

‘लाखों भक्तों को हुआ दुख, हम कमियां स्वीकार करते हैं’ — कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया के सामने बेहद भावुक होते हुए मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों में रही गंभीर कमियों को खुले दिल से स्वीकार किया। उन्होंने चढ़ावे की कथित चोरी पर गहरा खेद जताते हुए कहा, “इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से देश-दुनिया के लाखों राम भक्तों की भावनाओं को गहरा दुख पहुंचा है।” उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में तिरुपति मॉडल लागू होने के बाद मंदिर की पूरी व्यवस्था अभेद्य, मजबूत और पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी, जिससे आस्था पर कोई आंच नहीं आएगी।

बैठक में शामिल हुए देश के बड़े संत और प्रशासनिक अधिकारी, सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर

महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का एजेंडा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रस्तुत किया। बैठक में नौ में से सात स्थायी सदस्य व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। उपस्थित रहने वाले प्रमुख चेहरों में ट्रस्ट के सदस्य विश्व तीर्थ प्रसन्नाचार्य, स्वामी परमानंद गिरि, जगद्गुरु बासुदेवानंद सरस्वती, कृष्ण मोहन, महंत दिनेंद्र दास, पदेन सदस्य के रूप में अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट शशांक त्रिपाठी, विहिप नेता दिनेश चंद्र और विशेष आमंत्रित सदस्य महंत कमल नयन दास शामिल थे।

वहीं, तकनीकी माध्यम का उपयोग करते हुए ट्रस्ट के वरिष्ठ संयोजक के. परासरण, उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद, केंद्रीय सचिव प्रशांत लोखंडे और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए इस पूरी बैठक में हिस्सा लिया और अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सूत्रों के अनुसार, निवर्तमान पदाधिकारी चंदन राय और डॉ. अनिल मिश्रा इस बैठक से पूरी तरह दूर रहे।

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