
भारत के रियल एस्टेट और निर्माण उद्योग में एक नई क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। देश के पहले बड़े पैमाने पर 3D-प्रिंटेड रिहायशी घर अब गुजरात के धोलरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) में बनाए जाएंगे। यह ऐतिहासिक परियोजना नेस्टोरिया कंस्ट्रक्शन के नेतृत्व में शुरू की जा रही है, जो Nestoria Group और The GB Group की संयुक्त कंपनी (जॉइंट वेंचर) है। इस पहल को भारतीय निर्माण क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है, जो न केवल निर्माण की गति को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी बल्कि किफायती और टिकाऊ आवास की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित होगी।
साथ ही, यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि Nestoria Atulyam Society को GB Architects द्वारा डिजाइन किया गया है, जिन्होंने इस परियोजना को आधुनिक वास्तुकला, संरचनात्मक मजबूती और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है। उनका यह डिजाइन इस ऐतिहासिक 3D कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट को एक नई पहचान और विश्वस्तरीय स्वरूप प्रदान करता है।

धोलरा SIR, दिल्ली–मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) का प्रमुख हिस्सा है और इसे ‘वैश्विक मानक शहर’ बताया गया है। यह शहर विकसित भारत 2047 मिशन का एक अहम स्तंभ माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, स्मार्ट यूटिलिटी सिस्टम, औद्योगिक ज़ोन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ Dholera Smart City को भारत का भविष्य का स्मार्ट सिटी कहा जा रहा है। अब इसी भविष्य के शहर Dholera में भारत की पहली 3D-प्रिंटेड हाउसिंग कॉलोनी आकार लेने जा रही है, जो देश के शहरी विकास मॉडल को पूरी तरह बदल सकती है।
इस क्रांतिकारी परियोजना के केंद्र में एक अत्याधुनिक ‘मेक इन इंडिया’ 3D कंक्रीट प्रिंटिंग मशीन है, जिसे विशेष रूप से भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। यह मशीन किसी भी घर की मुख्य संरचना को महज तीन दिनों में तैयार करने में सक्षम है। जहां पारंपरिक निर्माण पद्धति में एक मकान बनाने में छह से बारह महीने तक का समय लग जाता है, वहीं यह 3D तकनीक डिजिटल नक्शे के आधार पर परत-दर-परत दीवारें खड़ी करती है। इसमें विशेष उच्च-मजबूती वाले कंक्रीट मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जिससे दीवारों की एकरूपता, मजबूती और सटीकता पारंपरिक निर्माण की तुलना में कहीं अधिक होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन एक रोबोटिक आर्म की तरह काम करती है, जो कंप्यूटर-जनरेटेड डिजाइन फाइल को पढ़कर सटीक निर्देशों के अनुसार निर्माण करती है। मशीन बिना थके दिन-रात काम कर सकती है, जिससे समय की भारी बचत होती है और मानव त्रुटि की संभावना भी लगभग समाप्त हो जाती है। इसके चलते निर्माण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय बन जाती है।
3D-प्रिंटिंग तकनीक से निर्माण के कई बड़े फायदे सामने आ रहे हैं। निर्माण समय में भारी कमी आती है और श्रम लागत भी काफी घट जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में मजदूरों की आवश्यकता नहीं होती। सामग्री का उपयोग बेहद सटीक तरीके से किया जाता है, जिससे निर्माण कचरा लगभग शून्य रह जाता है और साइट साफ-सुथरी बनी रहती है। पारंपरिक निर्माण की तुलना में धूल और शोर प्रदूषण भी बहुत कम होता है, जो आसपास के इलाकों के लिए राहत भरा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पारंपरिक निर्माण की तुलना में कहीं अधिक टिकाऊ है और भविष्य में शहरी विकास के लिए आदर्श मॉडल बन सकती है।
आज 3D निर्माण मॉडल को दुनिया के कई बड़े और विकसित देश तेजी से अपना रहे हैं। अमेरिका, यूरोप, चीन और मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों में 3D-प्रिंटेड घरों को एक नई और भरोसेमंद निर्माण पद्धति के रूप में स्वीकार किया जा चुका है। इसे कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि यह तकनीक कम समय, कम लागत और बेहतर गुणवत्ता के साथ घर बनाने की क्षमता रखती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी बढ़ती स्वीकृति यह साबित करती है कि 3D कंस्ट्रक्शन भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की ज़रूरत बन चुकी है, और भारत में इसका आगमन देश के निर्माण क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस तकनीक से बनने वाला पहला रिहायशी प्रोजेक्ट धोलरा स्मार्ट सिटी के केंद्रीय क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसे नेस्टोरिया कंस्ट्रक्शन ब्रांड के तहत लॉन्च किया जाएगा। डेवलपर्स के अनुसार, यह परियोजना एक मॉडल हाउसिंग प्रोजेक्ट के रूप में विकसित की जा रही है, जिसमें तेज डिलीवरी, किफायती कीमत और अंतरराष्ट्रीय स्तर की निर्माण गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत भविष्य में कई दर्जनों से लेकर सैकड़ों घरों तक का निर्माण 3D तकनीक से किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में धोलरा को भारत का पहला प्रमुख 3D-हाउसिंग हब बनाया जाए। इससे Dholera Properties और Dholera Investment plan को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, वहीं Best properties in dholera की तलाश करने वालों के लिए विकल्प भी बढ़ेंगे।
इस परियोजना के पीछे Nestoria Group और The GB Group का दशकों का अनुभव और भरोसा जुड़ा हुआ है। नेस्टोरिया ग्रुप (नेस्टोरिया बिल्डकॉन) पिछले 15 वर्षों से रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय है और 2018 से धोलरा SIR में विशेष रूप से काम कर रहा है। नेस्टोरिया उन शुरुआती निजी डेवलपर्स में शामिल रहा है जिन्होंने धोलरा की क्षमता को पहचाना और यहां निवेश किया। वहीं The GB Group, जिसकी स्थापना 1988 में हुई थी, पिछले 38 वर्षों से निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सक्रिय है। कंपनी ने देश के विभिन्न हिस्सों में आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है और समय पर डिलीवरी तथा निर्माण गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। दोनों समूहों की यह साझेदारी अनुभव, तकनीक और दूरदर्शिता का संगम मानी जा रही है।
इस परियोजना में स्वदेशी 3D निर्माण मशीनों का उपयोग ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियानों को सीधा समर्थन देता है। आयातित तकनीक पर निर्भरता घटेगी और देश में ही अत्याधुनिक निर्माण उपकरणों का विकास होगा। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत 3D कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र भी बन सकता है, जिससे देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, 3D-प्रिंटेड घरों की शुरुआत से धोलरा निवेश के लिहाज़ से और भी आकर्षक हो गया है। यहां निवेशकों को कम कीमत पर उच्च-गुणवत्ता वाला आवास, तेज प्रोजेक्ट डिलीवरी और भविष्य में बेहतर रिटर्न की संभावना मिल सकती है। शुरुआती निवेशकों के लिए यह परियोजना विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले वर्षों में किराया मांग और संपत्ति मूल्य दोनों में तेज वृद्धि की उम्मीद है।
धोलरा में 3D-प्रिंटेड घरों की शुरुआत भारतीय रियल एस्टेट और निर्माण उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है। Nestoria Group की क्षेत्रीय विशेषज्ञता और The GB Group के 38 वर्षों के अनुभव के साथ, यह संयुक्त पहल भारत को वैश्विक निर्माण मानचित्र पर नई पहचान दिलाने जा रही है। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 की ओर तेजी से बढ़ रहा है, धोलरा में यह परियोजना तकनीक, स्थिरता और दूरदर्शी नेतृत्व के संगम से भारत के शहरों का भविष्य गढ़ने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।














