ट्रंप का यू-टर्न : पहले चेतावनी, अब भारत से रूसी तेल खरीदने की अपील; जानें क्या है अमेरिका की मजबूरी?

वाशिंगटन/नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति के मंच पर अमेरिका की दोहरी चाल एक बार फिर उजागर हुई है। कल तक भारत को रूसी तेल खरीदने पर टैरिफ और पाबंदियों की धमकी देने वाले डोनाल्ड ट्रंप अब खुद भारत के सामने तेल खरीदने के लिए ‘रास्ता’ खोल रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का ऐलान किया है। जानकारों का कहना है कि यह कोई उदारता नहीं, बल्कि अमेरिका की फेल होती ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ का नतीजा है, जिसने खुद अमेरिका को बैकफुट पर धकेल दिया है।

ट्रंप का यू-टर्न: दबाव कम करने की मजबूरी?

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की घोषणा के एक दिन बाद डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने की अनुमति देगा। ट्रंप ने कहा, “मैं यह सिर्फ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए कर रहा हूं। हमारे पास बहुत सारा तेल है।” हालांकि, इसके पीछे की असली वजह पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध है। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी जंग के नौवें दिन हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) बंद होने से दुनिया के सामने गहरा तेल संकट खड़ा हो गया है।

हॉर्मुज की खाड़ी बंद: $92 के पार पहुंचा कच्चा तेल

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का मतलब है दुनिया की लाइफलाइन का कट जाना। वैश्विक एलएनजी (LNG) का करीब 90% हिस्सा यहीं से गुजरता है। कतर ने उत्पादन रोक दिया है और सऊदी अरब की ‘रास तानुरा’ फैक्ट्री बंद हो गई है। इराक ने भी प्रतिदिन 15 लाख बैरल उत्पादन कम कर दिया है। इन हालातों ने कच्चे तेल की कीमतों को 10-15% बढ़ाकर 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भारत सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है।

रूस ने भी दिखाया रंग, भारत के लिए बढ़ा आर्थिक संकट

अमेरिका के इस फैसले से भारत की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती दिख रही हैं। जैसे ही अमेरिका ने छूट का संकेत दिया, रूसी निर्यातकों ने मौके का फायदा उठाते हुए कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ा दीं। रूस का यूराल्स (Urals) तेल अब इंटरनेशनल रेट से भी महंगा हो चुका है। भारत के लिए यह बड़ी आर्थिक मुसीबत है क्योंकि कोरोना के बाद इकोनॉमी को संभालने में रूस के जिस सस्ते तेल ने मदद की थी, वह अब ‘प्रीमियम रेट’ पर मिल रहा है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और भारतीय रुपए पर भारी दबाव बढ़ गया है।

अमेरिका का नया दांव 

ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक्स (Twitter) पर लिखा कि भारत अमेरिका का एक अहम सहयोगी है और उन्हें उम्मीद है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। विशेषज्ञ इसे अमेरिका की सोची-समझी चाल मान रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि वैश्विक सप्लाई बनी रहे ताकि कीमतें और न भागें, लेकिन इस पूरी उठापटक में नुकसान भारत जैसे देशों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें अब महंगे कच्चे तेल के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी होगी।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

86 − = 85
Powered by MathCaptcha