Crude Oil on Fire: युद्ध से तेल बाजार में ‘महाविस्फोट’, $114 के पार कीमत; भारत पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। युद्ध के दसवें दिन ग्लोबल एनर्जी मार्केट में जबरदस्त धमाका हुआ। सोमवार (9 मार्च) को कच्चे तेल की कीमतें पिछले साढ़े तीन साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 114 डॉलर प्रति बैरल के भी पार निकल गईं। हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव और सप्लाई रुकने की खबरों ने दुनिया भर के बाजारों में महंगाई का डर पैदा कर दिया है।

कच्चे तेल में 26% की रिकॉर्ड तेजी: आसमान पर भाव

सोमवार सुबह ट्रेडिंग शुरू होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘ब्लैक गोल्ड’ यानी कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 24-26% के भारी उछाल के साथ $114.63 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी $107 के करीब ट्रेड करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो तेल की कीमतें $150 से $200 प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा: दुनिया का 20% तेल दांव पर

इस तबाही की सबसे बड़ी वजह सप्लाई चेन पर मंडरा रहा खतरा है। ईरान ने धमकी दी है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर देगा, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। इसके अलावा:

  • सप्लाई में कटौती: इराक, कुवैत और यूएई ने उत्पादन कम करने के संकेत दिए हैं।

  • हमलों का असर: अमेरिका-इजरायल के जवाबी हमलों में ईरान के तेल डिपो को निशाना बनाया गया है।

  • शिपिंग संकट: खाड़ी देशों से होने वाला निर्यात ठप होने के कगार पर है, जिससे एशियाई देशों (चीन, जापान, भारत) की चिंता बढ़ गई है।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान: ‘शांति के लिए छोटी सी कीमत’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की बढ़ती कीमतों पर बेबाक राय दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि तेल के दामों में यह उछाल अस्थायी है। ट्रंप ने कहा, “ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए यह एक बहुत छोटी कीमत है। जैसे ही यह मिशन पूरा होगा, कीमतें तेजी से नीचे आएंगी।” हालांकि, अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें पहले ही $4 प्रति गैलन के स्तर को छूने लगी हैं, जिससे वहां की आम जनता में भारी आक्रोश है।

क्या भारत में भी महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

दुनिया भर में मचे हाहाकार के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। सरकारी सूत्रों और तेल कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए इस बड़े उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल नहीं बढ़ेंगे।

  • मजबूत भंडार: भारत ने अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) और एनर्जी स्टॉक को पहले ही काफी मजबूत कर लिया है।

  • रूस से रियायत: हाल ही में अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी है, जिससे भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।

  • सरकारी रुख: सरकार फिलहाल आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने के पक्ष में नहीं है, ताकि घरेलू महंगाई को काबू में रखा जा सके।

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