ओम बिरला के बाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त निशाने पर! विपक्ष ला सकता है देश का पहला महाभियोग; क्या है मुख्य विवाद

नई दिल्ली। भारतीय संसद में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बीच अब विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन ने एक और बड़ा मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में महाभियोग का नोटिस दिया जाएगा।

क्या है मुख्य विवाद: वोटर लिस्ट और ‘SIR’ का मुद्दा

विपक्ष की इस नाराजगी की मुख्य वजह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) है। यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने और फर्जी या अवैध नामों को हटाने के लिए चलाया जा रहा एक देशव्यापी अभियान है।

  • विपक्ष का आरोप: टीएमसी (TMC) और कांग्रेस जैसे दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।

  • बंगाल का मामला: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि राज्य में लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट का दखल: हालांकि ममता बनर्जी ने इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

कैसे हटते हैं मुख्य चुनाव आयुक्त?

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के अनुसार, CEC को पद से हटाना आसान नहीं है। उनकी सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान होती है।

  • जरूरी समर्थन: प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

  • संसद में वोटिंग: नोटिस स्वीकार होने के बाद, संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) से इसे पारित होना अनिवार्य है।

  • अंतिम फैसला: दोनों सदनों से पास होने के बाद ही राष्ट्रपति उन्हें हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं।

बारी-बारी से वार: ओम बिरला के बाद ज्ञानेश कुमार

विपक्षी नेताओं के संकेतों के मुताबिक, यह रणनीति ‘क्रमबद्ध’ तरीके से अपनाई जाएगी। मंगलवार (10 मार्च) को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव पर बहस शुरू हो चुकी है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने सदन की गरिमा और निष्पक्षता का हवाला देते हुए स्पीकर को हटाने की मांग की है। विपक्ष की योजना है कि स्पीकर के मामले के निपटारे के तुरंत बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोला जाए।

बीजेपी का रुख: ‘संवैधानिक संस्थाओं पर हमला’

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इन कदमों को “हताशा” करार दिया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष चुनाव हारने के डर से संवैधानिक संस्थाओं जैसे चुनाव आयोग और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार हर संवैधानिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार है।

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