मिडिल ईस्ट युद्ध का तांडव: ईरान के ड्रोन हमले, अमेरिका ने 5,000 ठिकानों पर बरसाया कहर…दुनिया पर मंडराया तेल संकट

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ भीषण संघर्ष अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी यह जंग अब केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी है। मंगलवार को ईरान ने युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए इजराइल के साथ-साथ अरब देशों पर भी ड्रोन हमलों की बौछार कर दी, जिससे वैश्विक स्तर पर हड़कंप मच गया है।

ईरान का ‘ड्रोन तांडव’: UAE, सऊदी और बहरीन पर बरसीं मिसाइलें

मंगलवार को ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर एक साथ 9 ड्रोन हमले किए। इसके अलावा बहरीन की राजधानी मनामा में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया गया, जिसमें कई महिलाओं और बच्चों के घायल होने की खबर है। सऊदी अरब और कुवैत पर भी ईरानी ड्रोन्स ने घुसपैठ की कोशिश की। हालांकि, रक्षा प्रणालियों ने अधिकांश हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन इस नई लहर ने खाड़ी के उन देशों को भी युद्ध की आग में झोंक दिया है जो अब तक इससे दूर थे।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद: ‘एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे’

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नस दबाते हुए होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में टैंकरों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। ईरान ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक युद्ध जारी है, क्षेत्र से तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं निकलने दी जाएगी। इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और भाव 90 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

अमेरिकी ‘ऑपरेशन’ की गर्जना: 5,000 ठिकानों पर भीषण बमबारी

ईरान की हिमाकत के जवाब में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अब तक के सबसे विनाशकारी सैन्य अभियान का एलान किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के भीतर 5,000 से अधिक सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को निशाना बनाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि यदि ईरान ने तेल की सप्लाई रोकी, तो अमेरिका उसे अब तक की तुलना में 20 गुना ज्यादा ताकत से जवाब देगा।

मौत का आंकड़ा: ईरान में सबसे ज्यादा तबाही, 1200 से अधिक की गई जान

इस 11 दिनों के भीषण युद्ध में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक:

  • ईरान: 1,230 से अधिक लोगों की मौत।

  • लेबनान: कम से कम 397 लोगों ने जान गंवाई।

  • इजराइल: 11 लोगों की मृत्यु।

  • अमेरिकी सेना: 7 जांबाज सैनिक शहीद।

  • UAE: 6 लोगों की मौत और 122 घायल।

  • बहरीन: दर्जनों नागरिक हमलों का शिकार।

भारत समेत पूरी दुनिया में गहराया ‘फ्यूल संकट’

इस युद्ध की आंच भारत की रसोई और ऑटोमोबाइल सेक्टर तक भी पहुंच रही है। भारत समेत अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों में गैस और पेट्रोल का संकट गहरा गया है। सप्लाई चेन टूटने से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही युद्धविराम नहीं हुआ, तो यह संघर्ष 21वीं सदी की सबसे बड़ी आर्थिक और मानवीय त्रासदी में बदल सकता है।

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