
दुबई/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के 15वें दिन आज राजधानी तेहरान से लेकर खाड़ी के समंदर तक बारूद की गंध फैली हुई है। ईरान के ‘क्राउन ज्वेल’ कहे जाने वाले खार्ग आइलैंड (Kharg Island) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद हुई भारी बमबारी ने आग में घी डालने का काम किया है। अब ईरान ने खुली चेतावनी दी है कि वह मिडिल ईस्ट में फैले अमेरिकी तेल हितों को मिट्टी में मिला देगा।
खार्ग आइलैंड पर ट्रंप की ‘बिगेस्ट स्ट्राइक’, तेल फैक्ट्रियों पर लटकी तलवार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख तेल एक्सपोर्ट हब, खार्ग आइलैंड पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को “पूरी तरह तबाह” कर दिया है। ट्रंप ने इसे “मिडल ईस्ट के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी” करार दिया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तेल उत्पादन फैक्ट्रियों को निशाना नहीं बनाया गया है, लेकिन यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से जहाजों का रास्ता नहीं खोला, तो अगला निशाना ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ (तेल डिपो) ही होगा।
BREAKING Iran military threatens US-linked oil targets after Trump says Kharg Island bombed pic.twitter.com/KPObVqDAK9
— AFP News Agency (@AFP) March 14, 2026
ईरान की ‘ऑयल वॉर’ की धमकी: निशाने पर अरब देशों के अमेरिकी ठिकाने
खार्ग आइलैंड पर हमले से तिलमिलाए ईरान ने अब तक की सबसे बड़ी धमकी देते हुए कहा है कि वह अमेरिका से जुड़े हर उस ठिकाने को निशाना बनाएगा जहां से वॉशिंगटन को मुनाफा होता है। ईरान की सेना (IRGC) ने संकेत दिया है कि कतर, सऊदी अरब, यूएई, ओमान और इराक में सक्रिय अमेरिकी तेल कंपनियां जैसे ExxonMobil, Chevron और ConocoPhillips के प्लांट अब उनके राडार पर हैं। अगर ईरान इन ठिकानों पर ड्रोन या मिसाइल हमला करता है, तो वैश्विक तेल बाजार में ऐसा भूचाल आएगा जिसकी कल्पना भी नहीं की गई थी।
होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदी: दुनिया भर में तेल-गैस का हाहाकार
युद्ध के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई ठप हो गई है। केवल चुनिंदा जहाजों (जैसे हाल ही में भारत के दो एलपीजी जहाजों) को ही निकलने की अनुमति दी जा रही है। इस ब्लॉकेड की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका अब अपने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ से तेल निकालकर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध अप्रैल तक चला, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट में फंस जाएगी।
वैश्विक सप्लाई चेन ध्वस्त, शिपिंग रूट बदले
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है। अब जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च (Freight Cost) कई गुना बढ़ गया है। भारत समेत कई एशियाई देश, जो खाड़ी के तेल पर निर्भर हैं, इस समय सबसे ज्यादा दबाव में हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ईरान ने अपनी धमकी पर अमल किया, तो यह युद्ध केवल तीन देशों तक सीमित न रहकर वैश्विक महायुद्ध का रूप ले सकता है।














