नई दिल्ली/वाशिंगटन: भारत और अमरीका के बीच होने वाला बहुप्रतीक्षित अंतरिम व्यापार समझौता (Interim Trade Deal) फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमरीका अपनी नई वैश्विक टैरिफ व्यवस्था की तस्वीर साफ नहीं कर देता, तब तक इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। भारत का यह कड़ा रुख डोनल्ड ट्रंप की उन धमकियों के बीच आया है, जिसमें उन्होंने दुनिया भर के देशों पर फिर से भारी शुल्क लगाने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला खेल, मार्च की डेडलाइन खत्म
इस व्यापार समझौते पर पहले मार्च 2026 में हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि, अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने पूरी स्थिति को पलट कर रख दिया। अदालत के निर्णय के चलते अमरीका द्वारा पहले लगाए गए कई टैरिफ प्रभावहीन हो गए हैं और वर्तमान में अमरीका 15% टैरिफ वसूल रहा है। भारत का तर्क है कि जब तक नया टैरिफ स्ट्रक्चर पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक किसी भी डील पर मुहर लगाना भारतीय निर्यातकों के हितों के साथ समझौता होगा।
क्या थी शुरुआती डील और क्यों फंसा पेंच?
फरवरी में दोनों देशों के बीच एक शुरुआती सहमति बनी थी। इसके तहत अमरीका, भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने पर राजी हुआ था। साथ ही, ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को भी 25% से घटाकर 18% करने की योजना थी। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले की काट ढूंढने में लगा है। ट्रंप ने सोमवार को साफ कहा कि उनके पास दूसरे कानूनी प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार है और वह 1.6 ट्रिलियन डॉलर के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं।
मलेशिया के पीछे हटने से बढ़ी हलचल
अमरीका की अनिश्चित टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। मलेशिया ने हाल ही में अमरीका के साथ अपनी ट्रेड डील से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया है। मलेशिया का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराना समझौता अब ‘मान्य’ नहीं रह गया है। जानकारों का मानना है कि मलेशिया के इस कदम के बाद भारत ने भी सावधानी बरतते हुए ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की नीति अपनाई है।
तकनीकी बातचीत जारी, पर ‘नई शर्तों’ पर अड़ा भारत
भले ही दोनों देशों की टीमें तकनीकी पहलुओं और गैर-टैरिफ बाधाओं पर काम कर रही हैं, लेकिन भारत ने ट्रंप प्रशासन को संदेश दे दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर पुरानी या अस्पष्ट शर्तों पर समझौता नहीं करेगा। भारत चाहता है कि विशेष क्षेत्रों पर लगाए गए शुल्क और अन्य व्यापारिक अड़चनों का स्थायी समाधान निकले। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि ट्रंप प्रशासन ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 और सेक्शन 301 के तहत कौन से नए प्रावधान लेकर आता है।















