आईपीएल की शुरुआत के साथ अवैध फैंटेसी ऐप्स का उछाल….हजारों करोड़ के अंडरग्राउंड नेटवर्क पर ED की सख्ती

दुनिया भर के भारतीय क्रिकेट प्रेमी आईपीएल के अगले सीजन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 28 मार्च 2026 से शुरू होने वाले इस टूर्नामेंट को लेकर जहां उत्साह चरम पर है, वहीं इसके साथ अवैध फैंटेसी गेमिंग, सट्टेबाजी, जुआ और धोखाधड़ी का जाल भी तेजी से फैलता नजर आ रहा है। यह निर्विवाद है कि आईपीएल न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक है। इसमें भारी निवेश के साथ-साथ एक विशाल अंडरग्राउंड नेटवर्क भी सक्रिय है, जो खुलेआम संचालित हो रहा है।

हाल ही में पारित ‘ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन एंड रेगुलेशन एक्ट, 2025’ के तहत भारत में ऑनलाइन मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद, विदेशी (ऑफशोर) गेमिंग ऐप्स का प्रचार और अवैध संचालन जारी है।

पृष्ठभूमि

आईपीएल के आसपास फैंटेसी गेमिंग और सट्टेबाजी लंबे समय से प्रचलित है और अब यह एक तेजी से बढ़ता, लेकिन अधिकतर अवैध उद्योग बन चुका है। केवल 2026 में ही इसका कारोबार 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹1.25 लाख करोड़) से अधिक होने का अनुमान है। लाइव इन-प्ले सट्टेबाजी के कारण यह सीजन के दौरान चरम पर होता है, जिसमें अक्सर अवैध विदेशी प्लेटफॉर्म शामिल होते हैं। ये प्लेटफॉर्म वित्तीय धोखाधड़ी, लत और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर जोखिम पैदा करते हैं।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जहां आम लोगों के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) का उपयोग लेन-देन को छिपाने के लिए किया जाता है।

एक संगठित संरचना

PROGA लागू होने के बाद कई वैध खिलाड़ी ‘फ्री-टू-प्ले’ और सोशल गेमिंग मॉडल की ओर शिफ्ट हो गए हैं। लेकिन इस खाली जगह को अब अवैध और विदेशी फैंटेसी व सट्टेबाजी ऐप्स भर रहे हैं, जो टेलीग्राम चैनलों और इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से यूजर्स को लुभाते हैं। आईपीएल सीजन इनके लिए नए यूजर्स जोड़ने का बड़ा अवसर बन जाता है।

APK आधारित सट्टेबाजी इकोसिस्टम का उभार

सबसे चिंताजनक ट्रेंड APK फाइल्स के जरिए ऐप डाउनलोड करवाना है, जो आधिकारिक ऐप स्टोर्स के बाहर से इंस्टॉल कराए जाते हैं। इसके साथ ही नए दौर के इन्फ्लुएंसर्स भी लोगों को इस सिस्टम में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह जानकारी टेलीग्राम, व्हाट्सएप और निजी नेटवर्क्स के जरिए तेजी से फैलती है।

तकनीक और जाल

इन प्लेटफॉर्म्स को ‘ज्यादा मुनाफा देने वाले विकल्प’ के रूप में पेश किया जाता है। यूजर्स को आकर्षक ऑफर, मैच प्रेडिक्शन और रेफरल बोनस के जरिए फंसाया जाता है, जिससे वे बार-बार पैसे जमा करें।

ये ऑपरेटर बिना किसी निगरानी के, अक्सर मिडिल ईस्ट के जरिए, काम करते हैं और यूजर्स को वित्तीय धोखाधड़ी और डेटा चोरी के जोखिम में डालते हैं। कुछ नाम जैसे — Fantasy Cricket Guru, Teams4win, Cric11Forecast आदि — ऐसे नेटवर्क चला रहे हैं।

इन प्रमोटर्स की कमाई फिक्स पेमेंट, प्रति यूजर फीस और डिपॉजिट पर कमीशन के रूप में होती है। बताया जाता है कि नोएडा का एक प्रमोटर पिछले आईपीएल सीजन में 10 करोड़ रुपये से अधिक कमा चुका है, जिसमें अधिकांश नकद था।

सरकार की कार्रवाई

इस वर्ष की शुरुआत में सरकार ने 242 अवैध वेबसाइट्स को ब्लॉक किया, जिससे कुल ब्लॉक किए गए प्लेटफॉर्म्स की संख्या लगभग 8,000 हो गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही सख्त कार्रवाई हो सकती है।

जटिल नेटवर्क (Maze Operation)

कई प्लेटफॉर्म ऑफशोर कंपनियों और हवाला नेटवर्क के जरिए संचालित होते हैं, जिससे कार्रवाई कठिन हो जाती है। लेन-देन म्यूल अकाउंट्स और फर्जी UPI IDs के जरिए किया जाता है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और अनियंत्रित पूंजी प्रवाह की समस्या को बढ़ाता है।

इन प्लेटफॉर्म्स में न तो कस्टमर सपोर्ट होता है, न शिकायत निवारण तंत्र। कई ऐप्स में बॉट्स का उपयोग किया जाता है ताकि असली यूजर जीत न सके। पैसे जमा करने के बाद वापसी की कोई गारंटी नहीं होती।

बढ़ता प्रभाव

स्मार्टफोन और डिजिटल पहुंच के बढ़ने से ये प्लेटफॉर्म खासकर युवाओं और नए यूजर्स को आकर्षित कर रहे हैं। मनोरंजन और शोषण के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। सोशल मीडिया के जरिए इनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।

जागरूकता और सख्त कार्रवाई की जरूरत

आईपीएल सीजन के साथ इन अवैध गतिविधियों के बढ़ने की आशंका है। इससे निपटने के लिए जरूरी कदम:

  • डिजिटल प्रमोशन और इन्फ्लुएंसर्स की सख्त निगरानी
  • ऑफशोर ऑपरेटरों पर ED की कड़ी कार्रवाई
  • APK डाउनलोड के जोखिमों पर जागरूकता
  • वित्तीय संस्थानों और रेगुलेटर्स के बीच सहयोग

 

 

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