वॉशिंगटन/तेहरान। दुनिया एक बार फिर महाविनाश की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को लेकर अब तक की सबसे कड़ी और डरावनी चेतावनी दी है। ट्रंप ने ईरान के शासकों को ‘पागल कमीने’ तक कह डाला और साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि या तो होर्मुज की जलसंधि (Strait of Hormuz) को तुरंत खोल दिया जाए, वरना ईरान को ‘नरक’ बना दिया जाएगा। 48 घंटे की समय सीमा खत्म होने के बाद अब पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं कि मंगलवार को क्या होने वाला है।
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‘पावर प्लांट’ और ‘ब्रिज डे’: ट्रंप की सांकेतिक धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “मंगलवार का दिन ईरान में ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ होगा। ये दोनों एक ही दिन में होंगे। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा!!!” विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह इशारा ईरान के बिजली घरों और प्रमुख पुलों को निशाना बनाने की ओर है। उन्होंने आगे लिखा, “उस होर्मुज स्ट्रेट को खोल दो, वरना तुम नरक में रहोगे। बस देखते जाओ! अल्लाह की जय हो।” ट्रंप का यह अंदाज बता रहा है कि वे अब कूटनीति के बजाय सीधी सैन्य कार्रवाई के मूड में हैं।
ईरान ने ठुकराया अल्टीमेटम, उड़ाया अमेरिका का मजाक
ट्रंप के इस 48 घंटे के अल्टीमेटम को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने ट्रंप की धमकियों को ‘बेबस पुकार’ बताते हुए कहा कि अमेरिका घबराहट में ऐसे असंतुलित और बेवकूफी भरे कदम उठा रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। इससे पहले भी ट्रंप ने 10 दिन की मोहलत दी थी, लेकिन ईरान ने उसे नजरअंदाज कर दिया। अब स्थिति यह है कि समझौते की मेज खाली है और युद्ध के मैदान में बारूद की गंध तेज हो गई है।
होर्मुज जलसंधि क्यों है दुनिया के लिए ‘लाइफलाइन’?
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का वो सबसे अहम समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर ईरान इस रास्ते को बंद करता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। ट्रंप की सबसे बड़ी चिंता यही है कि ईरान इस रणनीतिक रास्ते का इस्तेमाल अमेरिका और उसके सहयोगियों को ब्लैकमेल करने के लिए कर रहा है। ट्रंप का ’48 घंटे का अल्टीमेटम’ इसी रास्ते को फिर से खुलवाने के लिए था।
28 फरवरी से जारी है खूनी संघर्ष
बता दें कि ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच यह भीषण युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सेना ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई शीर्ष नेता मारे गए थे। इसके बाद से ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान लगातार अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है, वहीं अमेरिका अब ईरान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को पूरी तरह तबाह करने की धमकी दे रहा है।













