नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़े वर्ग (OBC) में ‘क्रीमी लेयर’ आरक्षण को लेकर शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और तीखी टिप्पणी की है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जिन छात्रों के माता-पिता समाज में अच्छी नौकरियों में हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं, उनके बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर आना चाहिए। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर किसी बच्चे के माता-पिता आईएएस (IAS) अधिकारी हैं, तो फिर उसे आरक्षण का फायदा क्यों मिलना चाहिए?
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अदालत ने इस गंभीर विषय पर गहन विचार-विमर्श की जरूरत बताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
शैक्षिक और आर्थिक प्रगति से आती है सामाजिक मजबूती
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने आरक्षण के मूल उद्देश्य और वर्तमान स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा कि शैक्षिक और आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद समाज में गतिशीलता आती है। अगर एक बार कोई परिवार इस स्तर पर पहुंच जाता है, तो फिर उनके बच्चों द्वारा आरक्षण की मांग करना कभी खत्म नहीं होने वाला सिलसिला बन जाएगा। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “यह एक ऐसा गंभीर मुद्दा है जिस पर अब हमें गहराई से ध्यान देना होगा।”
सक्षम परिवारों के बच्चों को खुद छोड़ना चाहिए आरक्षण
सर्वोच्च अदालत ने समृद्ध परिवारों के बच्चों द्वारा आरक्षण का लाभ उठाने पर चिंता जाहिर की। पीठ ने कहा, “हम देख रहे हैं कि छात्रों के माता-पिता बहुत अच्छी नौकरियों में हैं, उनकी इनकम बेहतरीन है, फिर भी बच्चे आरक्षण की मांग कर रहे हैं। देखिए, ऐसे लोगों को अब आरक्षण की व्यवस्था से बाहर निकलना चाहिए। इस व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक मंथन की आवश्यकता है।”
EWS और OBC क्रीमी लेयर के बीच हो स्पष्ट अंतर
जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और ओबीसी (OBC) क्रीमी लेयर के बीच के अंतर को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का आधार सामाजिक पिछड़ापन नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से आर्थिक पिछड़ापन है। इसलिए, ओबीसी क्रीमी लेयर तय करने के मानदंड ईडब्ल्यूएस की तुलना में कहीं अधिक उदार होने चाहिए। अगर हम दोनों को एक ही तराजू में तौलेंगे और बराबर मान लेंगे, तो दोनों श्रेणियों के बीच का अंतर ही खत्म हो जाएगा।
आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़े लोगों को दूसरों के लिए छोड़नी होगी जगह
अदालत ने सरकार के मौजूदा नियमों का समर्थन करते हुए कहा कि एक संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जब माता-पिता आरक्षण का लाभ उठाकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं, सरकारी सेवा में आ जाते हैं और दोनों आईएएस अधिकारी बन जाते हैं, तो वे समाज के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच जाते हैं। उनके जीवन में सामाजिक गतिशीलता आ चुकी होती है। सरकार के ऐसे आदेश बिल्कुल सही हैं जो अब इन समृद्ध लोगों को आरक्षण से बाहर (क्रीमी लेयर के तहत) कर रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि आरक्षण के लाभ से बाहर किए जाने पर यही संपन्न लोग अब सरकार के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मानसिकता और स्थिति पर भी विचार करना जरूरी है। फिलहाल, कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिया है।













