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नई दिल्ली/कोलकाता/चेन्नई: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में गुरुवार का दिन रिकॉर्ड तोड़ने वाला साबित हुआ। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए मतदान ने पिछले सभी आंकड़ों को ध्वस्त कर दिया है। रात 10 बजे तक मिले आंकड़ों के अनुसार, बंगाल की 152 सीटों पर 92.66 फीसदी और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.14 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। इतनी भारी तादाद में मतदाताओं के बाहर निकलने के बाद अब सियासी गलियारों में एक ही चर्चा है—क्या यह ‘SIR’ (गहन पुनरीक्षण) का जादू है?
वोटर लिस्ट से हटे 69 लाख ‘अयोग्य’ नाम, बिहार से शुरू हुआ था बदलाव
दरअसल, मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने चुनाव परिणामों और वोटिंग प्रतिशत की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत पिछले साल बिहार चुनाव से हुई थी। संशोधित वोटर लिस्ट के आधार पर हुए उस चुनाव में बिहार से लगभग 69 लाख अयोग्य मतदाताओं को हटाया गया था, जबकि 26 लाख नए नाम जोड़े गए थे। वोटरों की संख्या में इस बड़े बदलाव के कारण बिहार में वोटिंग प्रतिशत में 9.96% का भारी इजाफा देखा गया था।
महिलाओं ने रचा इतिहास: क्या सत्ता विरोधी लहर को मात दे रहा है SIR?
बिहार चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया था। वहां न केवल मतदान प्रतिशत बढ़ा, बल्कि महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के मुकाबले 9 फीसदी अधिक रही। इसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा और सत्ताधारी एनडीए (NDA) ने 243 में से 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि विपक्षी गठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया। अब यही पैटर्न बंगाल और तमिलनाडु में भी दोहराया जाता दिख रहा है।
SIR की ताकत: फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों पर चुनाव आयोग का प्रहार
चुनाव आयोग का लक्ष्य देश भर की वोटर लिस्ट को पूरी तरह ‘शुद्ध’ करना है। इस प्रक्रिया के तहत मृत, डुप्लीकेट और शिफ्ट हो चुके फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। जब सूची से ऐसे नाम हट जाते हैं, तो केवल ‘असली’ वोटर ही बचते हैं। यही कारण है कि कुल मतदाताओं की संख्या कम होने के बावजूद मतदान का प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है, क्योंकि वोट देने वाले अधिकांश लोग सक्रिय होते हैं।
बंगाल में सियासी उबाल: 91 लाख नाम कटे, ट्रिब्यूनल में अटकी अपीलें
पश्चिम बंगाल में इस बार SIR के दौरान लगभग 91 लाख अयोग्य मतदाताओं के नाम काटे गए। हालांकि, इस पर विवाद भी कम नहीं है। नाम कटने के खिलाफ करीब 27 लाख लोगों ने अपील की है, वहीं नए नामों को चुनौती देने वाली 7 लाख अर्जियां भी सामने आई हैं। पहले चरण में केवल 136 लोगों को ही अपील के बाद वोट डालने की अनुमति मिली, जबकि शेष मामले ट्रिब्यूनल में लंबित हैं। 2021 में बंगाल में 82.30% वोटिंग हुई थी, जो इस बार 92% के पार जा चुकी है।
तमिलनाडु का समीकरण: 70 लाख वोटर कम हुए, पर उत्साह चरम पर
तमिलनाडु में भी तस्वीर काफी बदली हुई है। 2021 के चुनाव में जहां 6.26 करोड़ वोटर थे, वहीं SIR के बाद यह संख्या घटकर 5.73 करोड़ रह गई है। लगभग 70 लाख नाम हटाए गए हैं। पिछले चुनाव में 73.63% वोटिंग हुई थी, लेकिन इस बार 85.10% मतदान ने विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं कि क्या यह बंपर वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है या कुछ और।














