जंग के बीच हाल-ए-ईरान: बाजार तो खुले पर जेबें खाली, 15 लाख रियाल पहुंचा डॉलर; भुखमरी के डर से सहमा तेहरान

तेहरान: युद्ध की विभीषिका केवल बम और बारूद तक सीमित नहीं रहती, उसका असली और खौफनाक चेहरा तब दिखता है जब आम आदमी की थाली से रोटी गायब होने लगती है। ईरान और अमेरिका के बीच हुए नाजुक युद्धविराम के बाद तेहरान के बाजारों में दुकानों के शटर जरूर उठ रहे हैं, लेकिन सन्नाटा अब भी पसरा है। सड़कों पर गाड़ियां दौड़ रही हैं और कैफे में कॉफी की महक है, मगर हकीकत यह है कि एक औसत ईरानी नागरिक के लिए अब दो वक्त की रोटी जुटाना भी पहाड़ तोड़ने जैसा हो गया है।

सरकार का यू-टर्न: बजट के वादे फेल, फिर से लागू करनी पड़ी सस्ती दर

हफ्तों तक बमबारी झेलने के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार ने दिसंबर में जो बजट पेश किया था, उसमें भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर ‘सस्ती विनिमय दर’ को खत्म करने का फैसला लिया गया था। लेकिन युद्ध ने सरकार को घुटनों पर ला दिया है। रविवार को मंत्रिमंडल ने आपातकालीन फैसला लेते हुए गेहूं, दवाइयां और बच्चों के दूध जैसी जरूरी चीजों के लिए दोबारा सस्ती दर लागू कर दी है। अब सरकार 2,85,000 रियाल प्रति डॉलर की दर से आयात करेगी, जबकि खुले बाजार में डॉलर की कीमत 15.5 लाख रियाल के पार पहुंच चुकी है।

खाली होता खजाना: नेशनल डेवलपमेंट फंड से निकाला जा रहा पैसा

ईरान अपनी खाद्य सुरक्षा को बचाने के लिए अब अपने ‘सॉवरेन वेल्थ फंड’ (राष्ट्रीय विकास कोष) में भी हाथ डाल रहा है। सरकारी मीडिया के अनुसार, रणनीतिक भंडार को मजबूत करने के लिए इस कोष से एक अरब डॉलर निकाले जाएंगे। इस पैसे का उपयोग चावल, चीनी, मांस और सोयाबीन जैसी बुनियादी चीजों के आयात के लिए किया जाएगा। हालांकि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा और सोने का भंडार है, लेकिन बाजार की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।

टैंकरों का संकट: तेल है पर ले जाने वाला कोई नहीं

ईरान के सरकारी टेलीविजन का कहना है कि समस्या तेल उत्पादन की नहीं है, बल्कि लॉजिस्टिक्स की है। अमेरिका द्वारा बंदरगाहों की नाकेबंदी और बमबारी के कारण ‘खार्ग’ और ‘जस्क’ जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों तक खाली टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस वजह से तेल का निर्यात ठप है और विदेशी मुद्रा की आवक रुक गई है। हालांकि, प्रशासन अब इराक, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से होने वाले आयात पर निर्भर है और अकाल के डर को नकार रहा है।

‘अविश्वसनीय’ महंगाई: एक वक्त का खाना हुआ 6 गुना महंगा

ईरानी नागरिक किस कदर आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, इसका अंदाजा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट से लगाया जा सकता है। हादी नाम के एक यूजर ने बताया कि 8 साल पहले जिस कीमत पर 14 लोगों ने रेस्तरां में खाना खाया था, आज उतने ही पैसों में एक अकेले शख्स का खाना भी नहीं आता। खाने की कीमत में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। डर के मारे लोग घरों में राशन और पानी जमा कर रहे हैं, और बाहर घूमना या ऑनलाइन ऑर्डर करना अब गुजरे जमाने की बात हो गई है।

इंटरनेट बंदी: रोजगार पर सबसे करारी चोट

युद्ध और महंगाई के बीच ईरान के लोगों के लिए दो महीने से जारी इंटरनेट बंदी सबसे गहरा घाव बन गई है। लाखों लोगों का ऑनलाइन कारोबार ठप हो गया है और हजारों की नौकरियां जा चुकी हैं। जो लोग ऑनलाइन हैं, वे या तो सरकारी कनेक्शन पर निर्भर हैं या फिर महंगे VPN का सहारा ले रहे हैं। इंटरनेट पर यह पाबंदी न केवल संचार को रोक रही है, बल्कि देश की डिजिटल इकोनॉमी की कमर भी तोड़ रही है।

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