तेहरान/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में मचे भारी घमासान के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान ने अपने कड़े तेवर ढीले करते हुए पहली बार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए अपनी सहमति दे दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका से समुद्री नाकेबंदी हटाने की अपील करते हुए बातचीत का एक नया प्रस्ताव भेजा है। हालांकि, व्हाइट हाउस में बैठे डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल इस पर नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं।
ईरान का नया दांव: बातचीत की मेज पर रखीं 3 बड़ी शर्तें
ईरानी अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, तेहरान ने रविवार को अमेरिका के सामने एक ‘पीस डील’ का मसौदा रखा है। इसमें मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
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युद्ध विराम की गारंटी: अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष को तुरंत खत्म किया जाए और भविष्य में हमला न करने का लिखित आश्वासन मिले।
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होर्मुज और नाकेबंदी: अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाए, जिससे होर्मुज का रास्ता खुले और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके।
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परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा: जब ऊपर की दो शर्तें पूरी हो जाएं, तब परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे विवादित मुद्दों पर बातचीत की जाए।
ट्रंप का दो टूक जवाब: परमाणु मुद्दे पर नहीं होगा समझौता
ईरान की इन शर्तों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यदि परमाणु कार्यक्रम का समाधान किए बिना होर्मुज खोल दिया गया, तो वार्ता में अमेरिका का पक्ष कमजोर हो जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि युद्ध विराम और परमाणु कार्यक्रम, दोनों का समाधान एक साथ ही निकलना चाहिए। पिछले 48 घंटों में यह दूसरी बार है जब ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को ठुकराया है।
यूरिया संकट से निपटने के लिए भारत का ‘मिशन रूस’
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारत की खेती और यूरिया सप्लाई पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुकने से भारत में यूरिया की कमी होने का खतरा पैदा हो गया है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने रूस के साथ मिलकर 20,000 करोड़ रुपये का यूरिया प्लांट लगाने का फैसला किया है।
यह प्लांट रूस के टोल्याट्टी इलाके में लगेगा, जिससे सालाना 20 लाख टन यूरिया का उत्पादन होगा। इस प्रोजेक्ट में भारत की ओर से IPL, RCF और NFL जैसी दिग्गज कंपनियां करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी, जबकि बाकी की राशि रूसी कंपनी यूरालकेम ग्रुप खर्च करेगी।
ईरान में जासूसी कांड: स्टारलिंक डिवाइस के साथ कई गिरफ्तार
एक तरफ कूटनीतिक जंग चल रही है, तो दूसरी तरफ ईरान के अंदर जासूसी का बड़ा मामला सामने आया है। ईरानी पुलिस ने तेहरान और शिराज के इलाकों से कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे एलन मस्क की कंपनी ‘स्टारलिंक’ के सैटेलाइट इंटरनेट डिवाइस के जरिए संवेदनशील तस्वीरें और वीडियो विदेशी खुफिया एजेंसियों को भेज रहे थे। पुलिस का दावा है कि जासूसी के लिए बाकायदा फ्लैट किराए पर लिए गए थे।
सोमालिया में भुखमरी और ईरान के अस्पतालों पर हमले
जंग का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। समुद्री रास्ते बाधित होने से सोमालिया में करीब 5 लाख बच्चे भीषण कुपोषण और भुखमरी की कगार पर हैं, क्योंकि उन तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्री का दावा है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के 50 से ज्यादा अस्पतालों को भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान में फिर सुलग सकती है विद्रोह की आग
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के अंदर भी हालात सामान्य नहीं हैं। महंगाई और बेरोजगारी से परेशान जनता एक बार फिर सड़कों पर उतर सकती है। 1 मई यानी ‘मजदूर दिवस’ पर बड़े प्रदर्शनों की आशंका जताई जा रही है, जिससे ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ की नींद उड़ी हुई है।
अमेरिका-ईरान बातचीत में कहां फंसी बात?
1. परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद कर दे। लेकिन ईरान कहता है कि अगर रोक लगानी है तो वह ज्यादा से ज्यादा 5 साल के लिए ही होगी, हमेशा के लिए नहीं।
2. यूरेनियम का भंडार: अमेरिका चाहता है कि ईरान के पास मौजूद 400 किलो एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका के पास आ जाए। ईरान ने इस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है।
3. होर्मुज का खोलना: ईरान कहता है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी पाबंदी नहीं हटाता, तब तक वह इस समुद्री रास्ते पर रोक बनाए रखेगा। वहीं अमेरिका कहता है कि जब तक पूरा समझौता नहीं होता, पाबंदियां नहीं हटेंगी।
4. फ्रोजन एसेट्स: ईरान चाहता है कि उस पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं और उसके करीब 20 अरब डॉलर जो कि सीज कर लिए गए हैं, वापस किए जाएं।
5. युद्ध का हर्जाना: ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों से उसे जो नुकसान हुआ, उसके लिए करीब 270 अरब डॉलर का मुआवजा दिया जाए।
6. रीजनल इन्फ्लुएंस: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने सहयोगी समूहों जैसे हिजबुल्लाह और हमास को समर्थन कम करे और अपने मिसाइल प्रोग्राम को भी सीमित करे। ईरान इसके लिए तैयार नहीं दिख रहा।














