वॉशिंगटन: अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर देश की चुनावी व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया है। ट्रंप ने मौजूदा सिस्टम को “धांधली से भरा” बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि के लिए नुकसानदेह बताया है। चुनाव सुधारों की वकालत करते हुए ट्रंप ने ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (SAVE America Act) को जल्द से जल्द लागू करने की मांग तेज कर दी है, जिससे अमेरिकी राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप की चेतावनी: ‘देश का भविष्य खतरे में’
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर रिपब्लिकन नेताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि यदि चुनाव प्रणाली में तुरंत और कड़े बदलाव नहीं किए गए, तो अमेरिका का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने वर्जीनिया जैसे राज्यों में हालिया चुनावी घटनाक्रमों का हवाला देते हुए मेल-इन बैलेट्स (डाक मतपत्रों) पर संदेह जताया और इसे ‘बड़ी चुनावी चोरी’ का जरिया करार दिया।
क्या है ‘सेव अमेरिका एक्ट’? ट्रंप की 3 बड़ी शर्तें
ट्रंप जिस ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (Safeguard American Voter Eligibility Act) की मांग कर रहे हैं, वह मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर टिका है:
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अनिवार्य वोटर आईडी (Voter ID): मतदान के समय प्रत्येक मतदाता को अपनी फोटो पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा।
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नागरिकता का प्रमाण (Proof of Citizenship): केवल अमेरिकी नागरिक ही वोट डाल सकें, इसके लिए पंजीकरण के समय जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे ठोस दस्तावेज देना जरूरी होगा।
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मेल-इन वोटिंग पर लगाम: ट्रंप चाहते हैं कि डाक के जरिए मतदान की व्यवस्था लगभग खत्म हो। इसे केवल सेना, दिव्यांगों या गंभीर रूप से बीमार लोगों तक ही सीमित रखा जाए।
कार्यकारी आदेश और कानूनी लड़ाई
ट्रंप ने चुनाव सुधारों की अपनी मंशा को अमली जामा पहनाने के लिए 31 मार्च, 2026 को एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर भी हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य डाक विभाग (USPS) के जरिए केवल सत्यापित नागरिकों को ही मतपत्र भेजना सुनिश्चित करना था। हालांकि, इस आदेश को अदालतों में कड़ी चुनौती मिल रही है। डेमोक्रेटिक नेताओं और मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह “वोटर सप्रेशन” (मतदाताओं को दबाने) की कोशिश है और राष्ट्रपति के पास राज्यों के चुनाव नियमों को सीधे बदलने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
सीनेट में फंसा कानून: सियासी शह और मात का खेल
‘सेव अमेरिका एक्ट’ अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) से तो पास हो चुका है, लेकिन सीनेट में यह फिलिबस्टर (Filibuster) प्रक्रिया के कारण फंसा हुआ है। रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत के बावजूद, इसे पास कराने के लिए जरूरी 60 वोटों का आंकड़ा नहीं मिल पा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि गैर-नागरिकों का मतदान पहले से ही गैरकानूनी है, ऐसे में नए नियम केवल गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को कठिन बनाने की एक चाल है।














