कराची/इस्लामाबाद। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते राजनीतिक गतिरोध ने अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघकर आम आदमी की थाली पर सीधा हमला बोल दिया है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर कराची इस वक्त एक ऐसे भयानक ऊर्जा संकट की गिरफ्त में है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और सुरक्षा मानकों को झकझोर कर रख दिया है। शहर की तंग गलियों में अब चर्चा महंगाई की नहीं, बल्कि इस बात की है कि क्या आज घर का चूल्हा जल पाएगा?
पाइपलाइनों में दम तोड़ता दबाव: बेपटरी हुई जिंदगी
कराची के सबसे घनी आबादी वाले इलाकों, जैसे ओरंगी टाउन और मोमिनाबाद में गैस की किल्लत ने हाहाकार मचा दिया है। पाइपलाइनों में गैस का प्रेशर इतना कम हो चुका है कि चूल्हा जलाना तो दूर, गैस की गंध तक महसूस नहीं होती। लोग सुबह के अंधेरे से ही चूल्हों के पास बैठकर गैस आने का इंतजार करते हैं, लेकिन घंटों की प्रतीक्षा के बाद भी सन्नाटा ही हाथ लगता है। इस किल्लत ने बच्चों के स्कूल से लेकर दफ्तर जाने वालों तक की दिनचर्या को तहस-नहस कर दिया है।
प्लास्टिक के गुब्बारे: मजबूरी का ‘विस्फोटक’ आविष्कार
गैस के इस अकाल से निपटने के लिए कराची के नागरिकों ने एक ऐसा रास्ता निकाला है, जो किसी भी समय बड़े नरसंहार का कारण बन सकता है। एआरवाई न्यूज (ARY News) की रिपोर्ट के अनुसार, लोग अब प्लास्टिक के बड़े गुब्बारों में रसोई गैस भरकर उसे स्टोर कर रहे हैं। जैसे ही थोड़ी देर के लिए गैस आती है, बिजली के सक्शन पंपों के जरिए उसे इन अवैध प्लास्टिक बैग्स में खींच लिया जाता है। बाजार में ये बैग्स 1000 से 1500 रुपये की भारी कीमत पर बिक रहे हैं, जो एक गरीब परिवार के लिए बड़ी रकम है।
संकरी गलियों में ‘चलते-फिरते बम’, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन गैस भरे प्लास्टिक बैग्स को ‘चलता-फिरता बम’ करार दिया है। कराची की घनी बस्तियों में, जहां एक कमरे में पूरा परिवार रहता है, वहां गैस से भरा प्लास्टिक का थैला रखना सीधे तौर पर मौत को निमंत्रण देना है।
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घर्षण का खतरा: प्लास्टिक बैग को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने पर होने वाला मामूली घर्षण भी चिंगारी पैदा कर सकता है।
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सामूहिक विनाश: इन इलाकों में मकान एक-दूसरे से सटे हुए हैं। यदि एक घर में विस्फोट होता है, तो वह पूरे मोहल्ले को श्मशान में तब्दील कर सकता है।
लोगों का कहना है कि वे जानते हैं यह खतरनाक है, लेकिन उनके सामने ‘भूख’ और ‘खतरा’ दो ही विकल्प हैं, और पेट की आग बुझाने के लिए वे मौत से खेलने को तैयार हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव का ‘पाकिस्तान कनेक्शन’
दरअसल, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्र में जारी युद्ध जैसी स्थिति के कारण गैस की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, और डॉलर की कमी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति ने कराची जैसे शहरों को अंधेरे और अभाव की गर्त में धकेल दिया है। प्रशासन इस खतरनाक भंडारण पर लगाम लगाने में नाकाम दिख रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका हर पल बनी हुई है।















