
– नौ बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आए
– फिलहाल चार मैनेजरों के साथ तीन ठग और दलाल गिरफ्तार
– मास्टरमाइंड और गैंग का मुखिया पुलिस की पकड़ से दूर भागे
– 20 फीसदी कमीशन के एवज में ट्रस्ट के खातों का इस्तेमाल
भास्कर ब्यूरो
कानपुर। साइबर ठगी की रकम को बैंकों की मिलीभगत के जरिए खुर्द-बुर्द करने का खुफिया इनपुट पुलिस पड़ताल में सच साबित हुआ है। डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर ठगी के जरिए तमाम लोगों के बैंक खातों को कंगाल करने वाले साइबर डकैतों का बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गठजोड़ बेपर्दा हुआ है। फिलहाल, नौ बैंकों के कर्मचारियों की कारस्तानी सामने आई है। फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर चालू खाता खोलकर बड़े पैमाने पर ठगी की रकम को ठिकाने लगाया गया है। इसके साथ ही विभिन्न ट्रस्ट के खातों के जरिए भी साइबर ठगी की रकम की निकासी हुई है। एवज में ट्रस्ट के कर्ता-धर्ताओं को 20 फीसदी कमीशन दिया जाता था। दक्षिण पुलिस ने गोरखधंधे में शामिल चार बैंक मैनेजरों के साथ एक दलाल और साइबर ठगी गैंग के तीन गुर्गों को गिरफ्तार किया है। ठग कंपनी का कानपुर कमांडर और मुखिया फरार है।
गोरखधंधे में नौ बैंकों की साझेदारी
पुलिस कमिश्नर रघुवीरलाल ने बताया कि, साइबर ठगों का नेटवर्क फर्जी जीएसटी फर्म और उद्योग का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद कूटरचित दस्तावेज लगाकर विभिन्न बैंकों में चालू खाता खुलवाकर ऑनलाइन ठगी से रकम बटोरते थे। इस गोरखधंधे में फिलहाल, एक्सिस बैंक, यूको बैंक, यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, सीएसबी बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक, सिटी यूनियन बैंक का नाम सामने आया है। पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि, उपर्युक्त बैंकों के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों का सत्यापन किये बगैर चालू खातों को फर्जी पतों पर खोला जाता था। चेक-बुक और एटीएम कार्ड आदि की पोस्ट आफिस के जरिए डिलेवरी की स्थिति में बैंक में वापस लौटने के बाद नेटवर्क के हवाले कर दिया जाता था। साइबर ठगों के लिए यूपी का जामताड़ा बने कानपुर से गैंग के तीन गुर्गों को गिरफ्तार करने के बाद सवाल-जवाब हुए तो चार बैंक मैनेजरों और खाता खुलवाने वाले एक दलाल का नाम सामने आया।
खाता फ्रीज होने से पहले बड़ी निकासी
गैंग के तीन गुर्गों गुजैनी निवासी सोनू शर्मा और सतीश पाण्डेय तथा गोविंदनगर निवासी साहित विश्वकर्मा की गिरफ्तारी के बाद कमिश्नरेट पुलिस ने एक्सिस बैंक की कन्नौज शाखा में ऑपरेशन हेड बहराइच निवासी धर्मेंद्र सिंह और कानपुर देहात के रसूलाबाद निवासी सहायक शाखा प्रबंधक अमित सिंह के साथ-साथ स्वरूपनगर में सीएसबी बैंक के ब्रांच मैनेजर अमित कुमार और यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर आशीष कुमार तथा दलाल तनिष गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। दक्षिण जोन के डीसीपी दीपेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि, अभियुक्तों से पूछताछ में मालूम हुआ कि, किसी बैंक खाते में साइबर ठगी की रकम आने के बाद बैंक कर्मचारियों की मदद से आनन-फानन में तमाम खातों में बंदरबांट कर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त यदि पुलिस किसी खाते को फ्रीज करने के लिए पत्राचार करती थी तो बैंक अधिकारी तत्काल साइबर ठगों को खबरदार करने के साथ बड़े पैमाने पर धन-निकासी कराने के बाद खाता फ्रीज करते थे।
चार खातों में 182 करोड़ की ठगी की रकम
कमिश्नरेट पुलिस की पडताल में फिलहाल चार ऐसे खातों की जानकारी सामने आई है, जिसका साइबर ठगों ने ठगी के साथ-साथ हवाला के काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल किया है। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर एक खाते में 53 करोड़ 37 लाख, दूसरे खाते में 66 करोड़, तीसरे खाते में पांच करोड़ रुपए और नवी मुंबई में कानपुर निवासी शुभम गौड़ का खाता खुलवाकर 58 करोड़ रुपए ठिकाने लगाए गए हैं। गिरफ्तार अभियुक्त सोनू शर्मा के खाते में 67 करोड़ का लेन-देन मिला है, जबकि सतीश पाण्डेय के खाते में 53 करोड़ का लेन-देन सामने आया है। अभियुक्तों के कब्जे से 24 फर्जी जीएसटी फर्मों के कागजात और बैंक खातों के साथ-साथ 22 सिम-कार्ड, नौ मोबाइल और 16 म्यूल बैंक एकाउंट के कागजात बरामद हुए हैं। गिरोह का कानपुर कमांडर बर्रा निवासी राजवीर सिंह यादव उर्फ ओंकार फरार है। गैंग का मुखिया आगरा निवासी अंचित गोयल भी पुलिस के हत्थे नहीं आया है। राजवीर की छत्तीसगढ़ में लोकेशन मिली है।
कर्नाटक के मुस्लिम ट्रस्ट के खाते में 30 करोड़ खपाए
साइबर ठगों ने पुलिस की निगाह से बचने के लिए देश के विभिन्न ट्रस्ट के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। ट्रस्ट को खाते में पहुंचने वाली साइबर ठगी की रकम का 20 फीसदी कमीशन देकर काले धन को सफेद बनाने का खेल जारी था। राजवीर के गैंग ने कर्नाटक के अफजलपुर में जामिया इस्माइल ईसी ट्रस्ट काराजगी के खाते से डिजिटल अरेस्ट के 30 करोड़ रुपए खुर्द-बुर्द कराए थे। इस ट्रस्ट की गतिविधियां संदिग्ध हैं। राजवीर के बारे में जानकारी मिली है कि, किसी वक्त वह फिनो मर्चेंट बैंक में मैनेजर था। उसी दौरान उसका विभिन्न बैंकों के अधिकारियों से संबंध पुख्ता हुए और पर्दे की आड़ से साइबर ठगी के गैंग का कानपुर कमांडर बन गया।












