लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए तकनीक का नया अध्याय शुरू हुआ है। अवध क्षेत्र के 10 जिलों में सक्रिय ‘सामर्थ्य दुग्ध उत्पादक कंपनी’ अब पारंपरिक डेयरी कारोबार को पूरी तरह डिजिटल करने जा रही है। इस मुहिम के तहत ग्रामीण महिलाएं अब आधुनिक तकनीक और मोबाइल एप के जरिए दूध के उत्पादन, संग्रह और सीधे भुगतान की व्यवस्था को खुद मैनेज करेंगी।
‘सामर्थ्य साथी’ एप: मोबाइल स्क्रीन पर होगा दूध का पूरा हिसाब
राज्य सरकार ने दुग्ध कारोबार में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए ‘सामर्थ्य साथी’ नाम से एक मोबाइल एप लॉन्च किया है। यह एप ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तीकरण का बड़ा औजार साबित हो रहा है।
एप की मुख्य विशेषताएं:
-
रियल टाइम डेटा: दूध की बिक्री और मात्रा की तत्काल जानकारी।
-
क्वालिटी चेक: दूध की गुणवत्ता की जांच का डिजिटल रिकॉर्ड।
-
सीधा भुगतान: भुगतान की स्थिति और रिकॉर्ड की जानकारी।
-
तकनीकी प्रशिक्षण: महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान।
सवा लाख महिलाओं का नेटवर्क: बिचौलियों का खेल खत्म
योगी सरकार ने अवध और आसपास के जिलों में सवा लाख से अधिक महिलाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा है। वर्तमान में प्रतिदिन चार लाख लीटर से अधिक दूध के व्यापार को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। गांव-गांव में स्थापित संग्रह केंद्रों का संचालन खुद महिलाएं कर रही हैं, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है और पशुपालकों को बाजार की अनिश्चितता से मुक्ति मिली है।
पारदर्शी भुगतान प्रणाली: महीने में 3 बार सीधे खाते में आएगा पैसा
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी इसकी पारदर्शी भुगतान प्रणाली है। महिला किसानों को उनके दूध का मूल्य महीने में तीन बार (हर 10 दिन के अंतराल पर) सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है। बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से महिलाओं का भरोसा सिस्टम पर बढ़ा है। अब महिलाएं केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी भी स्वयं कर रही हैं।
इन 10 जिलों में बिछा तकनीकी नेटवर्क
उत्तर प्रदेश के इन जिलों में महिलाओं का यह विशाल डिजिटल नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय हो चुका है:
-
लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी।
-
सुल्तानपुर, बाराबंकी, उन्नाव।
-
प्रतापगढ़, कानपुर नगर और फतेहपुर।
योगी सरकार की यह पहल ‘आत्मनिर्भर गांव’ के मॉडल को मजबूती दे रही है। अब गांव की चौपाल से शुरू हुई यह दुग्ध क्रांति महिलाओं की मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच गई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रही है।










