नासिक/सोलापुर। महाराष्ट्र के नासिक और सोलापुर जिलों से इन दिनों ऐसी तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं, जो देश के अन्नदाता की बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। मंडियों में प्याज की बंपर आवक तो है, लेकिन खरीदार न मिलने और दाम ऐतिहासिक रूप से गिरने के कारण हजारों किसानों की कमर टूट चुकी है। मेहनत का सही मूल्य मिलना तो दूर, किसानों के लिए फसल की लागत निकालना भी नामुमकिन हो गया है। हालात इतने बदतर हैं कि प्याज उत्पादक बेल्ट में कई किसानों के सामने दिवालिया होने का संकट मंडराने लगा है।
सोशल मीडिया पर दर्द बयां: 1262 किलो प्याज और हाथ में ‘माइनस एक रुपया’
नासिक, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर से किसानों की बेबसी के कई हृदय विदारक मामले सामने आए हैं। पाथन तालुका के एक किसान की आपबीती सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने मंडी में 1,262 किलो प्याज बेचा, लेकिन जब उसकी पर्ची कटी और सारे खर्चे कटे तो उसके खाते में ‘माइनस 1 रुपया’ बचा। यानी फसल बेचने के बाद भी उसे अपनी जेब से पैसे देने पड़ गए। इसी तरह, सताना एपीएमसी (APMC) के किसान जितेंद्र सोलंकी को अपना 30 क्विंटल प्याज महज 175 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ा, जबकि इसे उगाने में 1,200 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आया था। जितेंद्र को सीधे तौर पर 36,000 रुपये का घाटा हुआ है। पुणे की मंडियों में भी किसान 4 से 5 रुपये प्रति किलो प्याज बेचने को मजबूर हैं, जबकि उत्पादन लागत 12 रुपये प्रति किलो से अधिक है।
बेमौसम बारिश और पश्चिम एशिया के युद्ध ने बिगाड़ा खेल
इस सीजन में महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक बेल्ट को दोहरी मार झेलनी पड़ी है। सबसे पहले बेमौसम बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे प्याज की क्वालिटी प्रभावित हुई और इस बार ग्रेड-1 प्याज की मात्रा काफी कम रही। इसके बाद रही-सही कसर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति ने पूरी कर दी। युद्ध के चलते विदेशों में मांग घट गई है और प्याज का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार बंद होने के कारण घरेलू थोक मंडियों में प्याज का स्टॉक जमा हो गया है और दाम उत्पादन लागत से काफी नीचे गिर गए हैं।
एशिया की सबसे बड़ी मंडी में सन्नाटा, 80% प्याज औंधे मुंह गिरा
देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी कहे जाने वाले नासिक के लासलगांव एपीएमसी में भी हालात बेहद गंभीर हैं। वैसे तो यहां आधिकारिक भाव 400 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल तक दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि करीब 80 फीसदी प्याज 800 रुपये प्रति क्विंटल (8 रुपये किलो) से भी कम में बिक रहा है। सोलापुर मंडी में भी हजारों क्विंटल प्याज की आवक हो रही है, लेकिन भाव 100 रुपये से 1,700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच ही सिमट कर रह गए हैं।
सरकार से मुआवजे की गुहार, ₹3500 MSP की मांग
महाराष्ट्र ऑनियन ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के मुताबिक, एक किलो प्याज उगाने और मंडी तक पहुंचाने का ब्रेक-ईवन (लागत) भाव कम से कम 18 रुपये प्रति किलो है। इसके मुकाबले किसानों को सिर्फ 4 से 8 रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं। इस महासंकट से जूझ रहे किसानों ने अब केंद्र की मोदी सरकार और राज्य सरकार से तत्काल दखल देने की अपील की है। किसानों की मांग है कि प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए और संकट की इस घड़ी में नुकसान की भरपाई के लिए 1,500 रुपये प्रति क्विंटल का मुआवजा दिया जाए। यदि सरकार ने जल्द ही राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया, तो यह संकट और गहरा सकता है।














