नई दिल्ली। भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले और वर्ष 2019 के भीषण पुलवामा आत्मघाती आतंकी हमले में शामिल खूंखार आतंकवादी अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद मुजफ्फराबाद के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ‘अब्दुल्ला कमाल’ नाम के एक मुख्य संदिग्ध आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पकड़ा गया आरोपी अब्दुल्ला कमाल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित वाह कैंट का रहने वाला है। सीटीडी ने उसे गुप्त ठिकाने पर ले जाकर कड़ी पूछताछ शुरू कर दी है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से आधुनिक हथियार भी बरामद किया गया है। पाकिस्तानी जांच एजेंसियां अब फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या हमजा बुरहान की हत्या में इसी बरामद हथियार का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस वारदात के दौरान मौके पर दो अन्य संदिग्ध भी मौजूद थे, जो फायरिंग के बाद भागने में सफल रहे। सुरक्षा एजेंसियां उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। इसी बीच मुख्य आरोपी अब्दुल्ला कमाल की एक एक्सक्लूसिव तस्वीर भी सामने आई है।
सिर में तीन गोलियां मार उतारा मौत के घाट, कमांडो सुरक्षा भी फेल
न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) से मिली जानकारी के अनुसार, मुजफ्फराबाद के एआईएमएस (AIMS) कॉलेज के ठीक बाहर गुरुवार को अज्ञात हमलावरों ने हमजा बुरहान पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। हमलावरों का निशाना इतना सटीक था कि तीन गोलियां सीधे हमजा के सिर में जा धंसीं। खून से लथपथ हालत में उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि हमजा बुरहान मुजफ्फराबाद के चीला बांदी इलाके में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की भारी सुरक्षा के बीच ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जी रहा था। उसे बाकायदा पाकिस्तानी कमांडो सुरक्षा, बुलेटप्रूफ गाड़ी और एस्कॉर्ट वाहन मिले हुए थे। इस कड़े पहरे के बावजूद हमलावरों ने उसे सरेआम मौत के घाट उतार दिया। मारे गए आतंकी को आज इस्लामाबाद के बर्मा टाउन स्थित फातिमा स्कूल परिसर में सुपुर्द-ए-खाक (दफनाया) किया जाएगा।
भारत से कानूनी तौर पर पाकिस्तान गया था, फिर बन गया कमांडर
मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला 23 वर्षीय हमजा बुरहान बेहद शातिर था। गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक, वह कुछ साल पहले पूरी तरह कानूनी तरीके से (वाघा बॉर्डर या वीजा के जरिए) भारत से पाकिस्तान गया था। वहां पहुंचने के बाद उसने भारत के खिलाफ हथियार उठा लिए और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ‘अल बद्र’ में शामिल हो गया। अपनी क्रूरता के दम पर वह जल्द ही इस संगठन का सक्रिय कमांडर बन बैठा। बाद में वह ‘अल बराक’ नामक एक अन्य आतंकी गुट के लिए भी काम करने लगा था।
वह पाकिस्तान की सरजमीं और पीओके से बैठकर कश्मीरी युवाओं को बरगलाने, उन्हें अल बद्र में भर्ती करने और आतंकी वारदातों के लिए टेरर फंडिंग (पैसा जुटाने) का मुख्य काम संभाल रहा था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह वर्ष 2020 में कश्मीर में सीआरपीएफ जवानों पर हुए ग्रेनेड हमलों का भी मुख्य सूत्रधार था। भारत सरकार ने उसकी खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए साल 2022 में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत उसे ‘नामित आतंकवादी’ घोषित किया था।
बुरहान वानी, जाकिर मूसा और आईएसआई का था बेहद करीबी
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के बेहद खास रहे हमजा बुरहान के संबंध कश्मीर घाटी को दहलाने वाले टॉप कमांडरों से थे। उसे घाटी के खूंखार पोस्ट ब्वॉय रहे बुरहान वानी, जाकिर मूसा, अबू दुजाना और अबू कासिम का सबसे करीबी सहयोगी और रणनीतिकार माना जाता था।
गौरतलब है कि हिजबुल का पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के हाथों मुठभेड़ में मारा गया था, जिसके बाद पूरी घाटी महीनों तक हिंसा की आग में झुलसी रही थी। बुरहान वानी के खात्मे के बाद जाकिर मूसा ने हिजबुल मुजाहिद्दीन की कमान संभाली थी, जिसे भारतीय सेना ने 23 मई 2019 को पुलवामा के त्राल इलाके में एक बेहद सटीक ऑपरेशन में ढेर कर दिया था। हमजा इन सभी मरे हुए आतंकियों का मुख्य हमदर्द था।
पुलवामा के उस काले दिन का जख्म, जब शहीद हुए थे हमारे 40 जांबाज
हमजा बुरहान जिस 14 फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश में शामिल था, वह भारत के इतिहास का सबसे कायरतापूर्ण हमला था। उस काले दिन श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर लेथपोरा इलाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक बड़ा काफिला गुजर रहा था। तभी जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों (RDX) से भरी एक स्कॉर्पियो/एसयूवी गाड़ी को जवानों से भरी बस से टकरा दिया था।
वह धमाका इतना भीषण था कि दो बसों के परखच्चे उड़ गए और देश के 40 वीर जवान शहीद हो गए थे। बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले की गहन जांच कर अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को इस हमले का मुख्य मास्टरमाइंड बताया था। इस महापाप के अलावा हमजा 18 नवंबर 2020 को पुलवामा के काकापोरा में सुरक्षाबलों के बंकर पर हुए ग्रेनेड हमले में भी वांछित था, जिसमें निशाना चूकने की वजह से 12 स्थानीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब पाकिस्तान में ही उसकी मौत के साथ पाप का एक और अध्याय बंद हो गया है।
4 महीने में पाकिस्तान के 4 बड़े आतंकियों की मौत
पाकिस्तान में पिछले 4 महीने में 4 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
1. लश्कर आतंकी- मोहम्मद कासिम गुज्जर
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद कासिम गुज्जर की फरवरी 2026 में पाकिस्तान के पेशावर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर हमला किया था। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई।
कासिम गुज्जर उर्फ सलमान/सुलेमान को भारत सरकार ने 2024 में UAPA के तहत घोषित आतंकवादी घोषित किया था। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, वह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था और जम्मू-कश्मीर में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करने का काम कर रहा था।
उस पर आतंकियों को हथियार और फंडिंग पहुंचाने, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भर्ती करने और कई आतंकी हमलों में भूमिका निभाने के आरोप थे।

2. जैश-ए-मोहम्मद कमांडर- सलमान अजहर
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के सीनियर कमांडर सलमान अजहर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वो एक ‘हिट-एंड-रन’ जैसी घटना का शिकार हुआ। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसे टारगेट किलिंग बताया गया था। इसकी भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई।
सलमान अजहर को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था। जैश-ए-मोहम्मद वही आतंकी संगठन है जिसे भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं।
सलमान अजहर संगठन के ऑपरेशनल नेटवर्क और भर्ती अभियान से जुड़ा हुआ था। बहावलपुर को लंबे समय से जैश का प्रमुख ठिकाना माना जाता रहा है।

3. लश्कर कमांडर- शेख यूसुफ अफरीदी
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की अप्रैल 2026 को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
यूसुफ अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेटवर्क से जुड़ा माना जाता था। वह कथित तौर पर संगठन के लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन सिस्टम को संभालता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे हाफिज सईद का करीबी भी माना जाता था।

4. हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर- सज्जाद अहमद
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मई 2026 में हिजबुल मुजाहिदीन का सीनियर कमांडर सज्जाद अहमद संदिग्ध परिस्थितियों में मारा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से घटना पर ज्यादा आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
सज्जाद अहमद मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बारामूला इलाके का रहने वाला था। कहा जाता है कि वह 1990 के दशक के अंत में पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। बाद में वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए फंडिंग, ट्रेनिंग और नेटवर्किंग जैसे काम संभालने लगा।
वह पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी एक्टिविटी के कॉर्डिनेशन में एक्टिव रोल निभा रहा था। हिजबुल मुजाहिदीन लंबे समय तक घाटी में एक्टिव प्रमुख आतंकी संगठनों में शामिल रहा है।














