कानपुर में ट्रैफिक गुंडई पर तगड़ा एक्शन: बीच सड़क ‘पंचायत’ करने वाले ई-रिक्शा और ऑटो चालक जाएंगे जेल,

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था को पंगु बनाने और राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बने ई-रिक्शा और बैटरी ऑटो चालकों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। शहर के व्यस्ततम घंटाघर चौराहे पर सड़क घेरकर ट्रैफिक जाम करने वाले चालकों के खिलाफ न सिर्फ गाड़ियां सीज की गई हैं, बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) भी दर्ज की गई है। ट्रैफिक पुलिस की लगातार नाकामी के बाद अब खुद ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) डॉ. विपिन टाडा ने कमान संभाल ली है, जिससे शहर के अराजक वाहन चालकों में हड़कंप मच गया है।

खाकी के सामने ही सड़क घेरकर जुटा रहे थे सवारी, 4 अरेस्ट

कार्रवाई की शुरुआत कलक्टरगंज थाना क्षेत्र से हुई है। शुक्रवार को जब घंटाघर चौराहे पर रूटीन वाहन चेकिंग अभियान चल रहा था, तभी पुलिस की मौजूदगी को ठेंगा दिखाते हुए कुछ मनबढ़ ई-रिक्शा और ऑटो ड्राइवर बीच सड़क पर गाड़ियां तिरछी खड़ी करके सवारियां भरने और आपस में पंचायत करने में मशगूल थे। कलक्टरगंज थाना प्रभारी विनय तिवारी ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत एक्शन लिया और दो ऑटो, एक बैटरी ऑटो और एक ई-रिक्शा को एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत सीज कर दिया। इसके साथ ही चारों ड्राइवरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अनुराग मिश्रा (गोविंदनगर), मनोज वर्मा (बर्रा), महेंद्र सिंह (कल्याणपुर) और आयुष मौर्य (उन्नाव) के रूप में हुई है।

सोमवार से पूरे कानपुर में चलेगा महा-अभियान, सभी थानों को अल्टीमेटम

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह तो महज एक ट्रेलर था। ई-रिक्शा और बैटरी ऑटो की गुंडागर्दी और अराजकता को जड़ से खत्म करने के लिए सोमवार से पूरे शहर में एक व्यापक और सघन अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए शहर के सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में सड़कों पर लगने वाले अवैध ई-रिक्शा स्टैंडों और बीच सड़क गाड़ियां रोकने वालों पर तत्काल कार्रवाई करें। चर्चा है कि ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर डॉ. विपिन टाडा खुद इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग करेंगे और जमीनी हकीकत परखने के लिए हर रोज शाम को सड़कों पर औचक निरीक्षण के लिए उतरेंगे।

ट्रैफिक पुलिस के ‘धुरंधर’ फेल, धड़ाम हो चुकी हैं पुरानी योजनाएं

कानपुर में ई-रिक्शा का आतंक नया नहीं है। इससे पहले भी इस अराजकता पर लगाम लगाने के लिए शहर में दो बार भारी-भरकम बजट और दावों के साथ ‘क्यू-आर कोड योजना’ शुरू की गई थी। पहली बार नगर निगम के सहयोग से और दूसरी बार पुलिस ने अपने दम पर इसे लागू करना चाहा था। दूसरी बार तो खुद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने दावा किया था कि कलर-कोडिंग आधारित क्यूआर कोड योजना से ट्रैफिक सुधर जाएगा। लेकिन ट्रैफिक पुलिस के आला अफसरों के आपसी तालमेल की कमी और ढुलमुल रवैए के कारण दोनों ही बार यह योजना ‘टायं-टायं फिस्स’ हो गई। यही वजह है कि अब सिविल पुलिस को इस मोर्चे पर सीधे उतरना पड़ा है।

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