यूपी एटीएस की बड़ी कामयाबी: अंतरराष्ट्रीय घुसपैठ और मानव तस्करी सिंडिकेट के 15 दोषियों को 5-5 साल की जेल…..पुख्ता सबूतों के आगे टिक नहीं पाए अपराधी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) को मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ कानूनी मोर्चे पर बहुत बड़ी सफलता मिली है। लखनऊ स्थित एनआईए/एटीएस (NIA/ATS) की विशेष अदालत ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों से जुड़े एक संगठित गिरोह के 15 सदस्यों को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी दोषियों को 5-5 साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

2021 के महाअभियान में हुआ था भंडाफोड़, ऐसे फैला था जाल

इस पूरे मामले की शुरुआत 26 अक्टूबर 2021 को हुई थी, जब यूपी एटीएस ने एक खुफिया इनपुट के आधार पर बड़ा अभियान चलाकर कई संदिग्धों को दबोचा था। इन सभी पर भारत में अवैध रूप से घुसपैठ करने, जाली दस्तावेज तैयार करने और देश विरोधी गतिविधियों के लिए मानव तस्करी नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप थे। शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद जब एटीएस ने मामले की गहन विवेचना शुरू की, तो कड़ियां जुड़ती गईं और एक ऐसे संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ जिसके तार म्यांमार, बांग्लादेश और भारत के कई राज्यों से जुड़े थे।

म्यांमार-बांग्लादेश से घुसपैठ कराकर बनवाते थे ‘भारतीय पासपोर्ट’

एटीएस की चार्जशीट और जांच रिपोर्ट में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट किस कदर देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहा था। यह गिरोह बांग्लादेश और म्यांमार से रोहिंग्या और अन्य नागरिकों को अवैध रास्तों से भारत की सीमा में प्रवेश कराता था। इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपाकर उन्हें भारतीय नागरिक साबित करने के लिए फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य कूटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार करवाए जाते थे। हद तो तब हो गई जब इन्हीं जाली कागजातों के दम पर यह सिंडिकेट उनके असली दिखने वाले ‘भारतीय पासपोर्ट’ भी तैयार करवा लेता था और फिर उन्हें काम दिलाने के बहाने विदेशों में भेजकर मानव तस्करी को अंजाम देता था।

ये हैं वो 15 आरोपी जिन पर अदालत में साबित हुए गुनाह

एटीएस की मजबूत पैरवी और पुख्ता सबूतों के चलते कोर्ट ने जिन आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा है, उनमें से प्रमुख नामजद चेहरों में असीदुल इस्लाम उर्फ विजय दास, हुसैन मोहम्मद फहद उर्फ मानिक दत्ता, अल अमीन अहमद उर्फ राजेश विश्वास, जैबुल इस्लाम उर्फ गोविंदा दास, जमील अहमद उर्फ पलाश विश्वास, राजीब हुसैन उर्फ अजीत दास, शखावत खान उर्फ गोलक मंडल, अलाउद्दीन तारिक उर्फ रिंकू विश्वास, नूर अमीन, और खोखन सरदार उर्फ मोहम्मद कय्यूम अंसारी शामिल हैं। इन सभी को एटीएस ने देश के विभिन्न हिस्सों से साक्ष्यों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

पुख्ता सबूतों के आगे टिक नहीं पाए अपराधी, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्माना

विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान यूपी एटीएस की लीगल टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, जाली दस्तावेजों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों को बेहद प्रभावी ढंग से पेश किया। अदालत ने माना कि इन आरोपियों का कृत्य देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था। सभी 15 आरोपियों को अवैध घुसपैठ, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने और मानव तस्करी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए 5-5 साल की कड़ी कैद और अर्थदंड भुगतने का आदेश दिया गया। जुर्माना न भरने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा काटनी होगी। यूपी एटीएस ने इस फैसले को अवैध घुसपैठ के खिलाफ एक बड़ी नजीर बताया है और साफ किया है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐसे गिरोहों के खिलाफ उनका अभियान पूरी सख्ती के साथ आगे भी जारी रहेगा।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment