​Sitapur : जन्म-जन्म तक ऐसा अपराध करता रहूँगा…’ नोटिस मिलते ही फूटा पूर्व विधायक का दर्द, भाजपा में खलबली

 

  • शंकराचार्य के स्वागत के बाद पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के बंगले पर चिपका नोटिस, गरमाई सियासत
  • ​नजूल की जमीन पर अवैध कब्जे का हवाला देकर प्रशासन ने थमाई नोटिस, 21 अन्य करीबियों पर भी गिरी गाज

Sitapur : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज की ‘गौध्वज स्थापना भारत यात्रा’ के आगमन के बाद से ही जिले का सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। शंकराचार्य की मेजबानी करने वाले समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के नए बंगले पर जिला प्रशासन द्वारा नोटिस चश्मा किए जाने के बाद से पूरे महकमे और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इतना ही नहीं, पूर्व विधायक के अगल-बगल रहने वाले उनके 21 अन्य करीब के मकानों पर भी प्रशासन ने ताबड़तोड़ नोटिस चश्मा कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि शंकराचार्य के आगमन और पूर्व विधायक द्वारा उनके खुलकर किए गए स्वागत से सत्तारूढ़ भाजपा के खेमे में भारी बौखलाहट है, जिसके बाद आनंद-फानन में यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

बंगले पर प्रशासनिक नोटिस चश्मा होते ही पूर्व विधायक अनूप गुप्ता का दर्द और आक्रोश सोशल मीडिया के जरिए खुलकर सामने आ गया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें परम पूज्य जगद्गुरु भगवान स्वामी शंकराचार्य महाराज का स्वागत, पूजन और आशीर्वाद प्राप्त करने का परम सौभाग्य मिला है, और अगर इसी कारण किसी के मन में उनके प्रति ईर्ष्या-द्वेष की भावना पैदा हुई है या किसी को यह अपराध लगता है, तो वे ऐसी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने एलानिया लहजे में कहा कि यदि अपने आराध्य, साधु-संतों, गुरुजनों और ब्राह्मणों का सम्मान करना, सनातन धर्म की सेवा करना, गौमाता की रक्षा का संकल्प लेना और अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करना अपराध माना जाता है, तो ऐसा ‘अपराध’ वे जीवन भर और जन्म-जन्मों तक करते रहेंगे। उन्होंने दोटूक कहा कि उनके लिए धर्म, आस्था और संस्कृति किसी राजनीतिक लाभ का सौदा नहीं, बल्कि जीवन के संस्कार हैं और वे सदैव अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे।

​चर्चाओं का बाजार गर्म है कि शंकराचार्य द्वारा देश भर में छेड़ी गई इस धार्मिक यात्रा से आगामी चुनाव में भाजपा के सियासी समीकरण बिगड़ सकते हैं, जिससे बौखलाकर विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों और कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कार्रवाई का शंकराचार्य के दौरे से कोई लेना-देना नहीं है। जिला प्रशासन और डीएम की ओर से जारी यह नोटिस दरअसल बेसकीमती नजूल और सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण व कब्जों को लेकर नियमानुसार जारी की गई है। बहरहाल, इस पूरे मामले के पीछे का असली सच क्या है—यह विशुद्ध रूप से प्रशासनिक कार्रवाई है या फिर सोची-समझी राजनीतिक रंजिश—यह तो आने वाले समय में जांच और वक्त के साथ ही साफ हो पाएगा, लेकिन फिलहाल इस नोटिसबाजी ने सीतापुर की राजनीति में एक बड़ा भूचाल जरूर ला दिया है।

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