
Siswa Bazar, Maharajganj : कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिसवा कंपोजिट शिक्षा के मंदिर में शनिवार की सुबह ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। लगातार बारिश के बाद प्राथमिक विद्यालय का पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो गया। सुबह करीब 7:45 बजे तक विद्यालय का मुख्य गेट बंद रहा। दो शिक्षिकाएं अंशु अग्रवाल व निधि मिश्रा पहुंचीं तो किसी तरह गेट खोला गया और अंदर का नजारा देखकर उनके भी होश उड़ गए। शिक्षिका के अनुसार, “विद्यालय परिसर में चारों ओर पानी भरा था। जैसे-तैसे अंदर पहुंचे तो छोटे-बड़े साँप निकलते दिखाई दिए। स्थिति इतनी भयावह थी कि बच्चों के आने की संभावना ही नहीं रही।” बारिश और सुरक्षा के अभाव के कारण अधिकांश बच्चे विद्यालय नहीं पहुंचे।

चौंकाने वाली बात यह रही कि विद्यालय परिसर में कुछ बाहरी लोग भी बैठे मिले, जबकि परिसर की सुरक्षा का कोई इंतजाम नजर नहीं आया। सवाल यह है कि जहां नन्हे बच्चों को पढ़ाई करनी है, वहां बाहरी लोगों की मौजूदगी कैसे हो रही है? यदि कोई अप्रिय घटना हो जाती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता? विद्यालय परिसर में जलभराव, झाड़-झंखाड़ और साँपों की मौजूदगी यह बताने के लिए काफी है कि बरसात से पहले न तो साफ-सफाई कराई गई और न ही जल निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था की गई। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण विद्यालय बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान बनने के बजाय जोखिम का केंद्र बन गया है। सरकार एक ओर बेहतर शिक्षा और सुरक्षित विद्यालयों के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर यह तस्वीर उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना यह होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग, विद्यालय प्रबंधन और संबंधित स्थानीय निकाय इस लापरवाही पर कार्रवाई करते हैं या फिर बच्चों की जान को यूं ही जोखिम में डालकर व्यवस्था चलती रहेगी।










