जयपुर मर्डर केस: “वो मुझे मार डालेंगे…”! हत्या से पहले ही नीरज को था जान का खतरा, FIR में भाई ने किया खुलासा

जयपुर: राजस्थान के चर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में एक ऐसा नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है, जिसने पुलिस प्रशासन से लेकर आम जनता तक को स्तब्ध कर दिया है। मृतका के भाई राकेश कुमार शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर (FIR) से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि नीरज शर्मा को अपनी हत्या की आशंका पहले से ही थी। उन्हें इस बात का अहसास था कि उनकी जान ली जा सकती है।

अपनों के बीच ही बैठे थे जान के दुश्मन

एफआईआर के मुताबिक, करीब एक साल पहले अपने पति विजय कुमार शर्मा के निधन के बाद नीरज पूरी तरह टूट चुकी थीं। वह अपने 17 साल के दिव्यांग बेटे आर्यन वशिष्ठ के साथ रह रही थीं और लगातार अपने भाई राकेश के संपर्क में थीं। नीरज ने कई बार अपने भाई को फोन पर रोते हुए बताया था कि उनके अपने ही घर में उनकी जान के दुश्मन बैठे हैं। उन्होंने साफ तौर पर आशंका जताई थी कि उनकी सास, जेठ का बेटा बलराम उर्फ रवि और खुद उनकी अपनी बेटी आयुषी शर्मा मिलकर उनकी हत्या कर सकते हैं।

पैसा, प्रॉपर्टी और अनुकंपा नौकरी का खूनी खेल

भाई राकेश ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि पति की मौत के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग नीरज पर संपत्ति, पैसों और अनुकंपा के आधार पर मिलने वाली सरकारी नौकरी के लिए लगातार दबाव बना रहे थे। राकेश ने सीधा आरोप लगाया है कि इसी धन-दौलत और नौकरी के लालच में नीरज को रास्ते से हटाने की यह खौफनाक साजिश रची गई।

साजिश के तहत एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश

घटना वाले दिन यानी 4 जुलाई की शाम करीब 6:26 बजे, नीरज की बेटी आयुषी शर्मा ने अपने मामा राकेश शर्मा को फोन कर सिर्फ इतना कहा, “मम्मी का एक्सीडेंट हो गया है और उनकी मौत हो गई है।” इतना बोलकर आयुषी ने फोन काट दिया। सूचना मिलते ही जब राकेश मौके पर पहुंचे, तो वहां के हालात देखकर उन्हें गहरी साजिश का शक हुआ।

राकेश ने पुलिस को बताया कि उनकी बहन नीरज की मौत किसी अज्ञात वाहन से हुई दुर्घटना नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें गाड़ी से कुचलकर मौत के घाट उतारा गया है। उन्होंने अपनी भांजी आयुषी, नीरज की सास और जेठ के बेटे बलराम पर हत्या का सीधा आरोप लगाया है।

जांच की दिशा बदली, पुलिस खंगाल रही सबूत

जयपुर पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में पहले ही कुछ चौंकाने वाले खुलासे कर चुकी है, लेकिन इस एफआईआर के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है। पुलिस अब आरोपियों की कॉल डिटेल (CDR), डिजिटल साक्ष्य और घटनास्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। हालांकि, ये तमाम आरोप अभी मृतका के भाई द्वारा लगाए गए हैं और मामले की असली सच्चाई पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगी।

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