बगदाद/वाशिंगटन: मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठ गया है। पिछले तीन दिनों से जारी भीषण सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह जंग अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले 72 घंटों में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद कम से कम 6 अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US Bases) पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए हैं। वहीं, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने सिर्फ तीन रातों में ईरान के 300 से अधिक ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया है। इस भीषण टकराव के बाद दोनों पक्षों के बीच चल रहा सीजफायर पूरी तरह खत्म हो चुका है और ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
जंग के बीच जल उठा कंटेनर जहाज, पेंटागन के रिफ्यूलिंग स्टेशन पर सरप्राइज अटैक
फरवरी 2026 में शुरू हुए इस ईरान युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कोशिशें हुईं, लेकिन हाल ही में हुआ अंतरिम समझौता तब टूट गया जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया। इस दौरान निर्धारित रूट से हटकर जा रहे जहाजों को ईरानी क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने निशाना बनाया। ईरान के हमले में साइप्रस के झंडे वाले एक बड़े कंटेनर जहाज ‘M/V GFS Galaxy’ में भीषण आग लग गई, और उसका एक क्रू मेंबर लापता बताया जा रहा है। अमेरिका ने इसे सीधा हमला करार दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े निर्देशों पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू की। अमेरिकी फाइटर जेट्स ने तीन रातों में ईरान के मिसाइल साइट्स, ड्रोन बेस और नौसैनिक ठिकानों सहित 300 जगहों पर बमबारी की। इस हमले से ईरान के बंदर अब्बास, सिरिक, बुशहर और जास्क जैसे तटीय इलाके धमाकों से दहल उठे।
जॉर्डन से बहरीन तक गूंजे सायरन, अमेरिकी F-35 बेस पर गिरीं ईरानी मिसाइलें
अमेरिका के इस विनाशकारी हमले के जवाब में ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ईरान ने एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। सबसे बड़ा हमला जॉर्डन के मुवाफक सल्ती एयर बेस पर हुआ, जहां अमेरिका के अत्याधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स तैनात हैं। इसके अलावा, बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना की 5वीं फ्लीट के मुख्यालय, कुवैत, कतर, UAE और ओमान में स्थित अमेरिकी बेसों पर भी ईरान ने मिसाइलें बरसाईं। IRGC का दावा है कि उन्होंने प्रिंस हसन एयर बेस पर अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन के हैंगरों और कमांड सेंटरों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ओमान में स्थित पेंटागन के एक रिफ्यूलिंग स्टेशन पर भी ईरान द्वारा सरप्राइज अटैक किए जाने की खबर है, जिसके बाद तेहरान के आसमान में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा तनाव, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उबाल
ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी शर्तों के मुताबिक ‘ईरानी व्यवस्था’ लागू नहीं होती, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला जाएगा। ईरान अब इस जलमार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से टैक्स वसूलना चाहता है, जिसका अमेरिका और उसके सहयोगी देश कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस बंद के कारण दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी उछाल देखने को मिल रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी इस कड़े रुख का समर्थन किया है, जिससे यह साफ है कि तेहरान इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं है।
ट्रंप प्रशासन की दोटूक चेतावनी, ‘पैक्स इरानिका’ के चक्रव्यूह में फंसे खाड़ी देश
इस महायुद्ध पर अमेरिका के रक्षा सचिव (Defense Secretary) पीट हेगसेथ ने दोटूक शब्दों में कहा है कि ईरान ने गलत रास्ता चुना है और अब उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को मिलने वाली तेल बिक्री की सभी छूटों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है और राष्ट्रपति ट्रंप ने और बड़े हमलों की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खाई है, जिससे यह लड़ाई और व्यक्तिगत और हिंसक हो गई है। इस पूरे टकराव में जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे देश बीच में पिस रहे हैं, क्योंकि उनकी धरती पर अमेरिकी बेस होने के कारण वे सीधे तौर पर ईरान के निशाने पर आ गए हैं। अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का नया दौर शुरू हो जाएगा।















