दिल्ली दंगा 2020: वो 4 पुख्ता सबूत, जिनकी वजह से ताहिर हुसैन कानून के शिकंजे में फंसा…जानें पूरी टाइमलाइन

नई दिल्ली: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित और जघन्य मामलों में से एक—इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के जांबाज अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व निगम पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य साजिशकर्ता और दोषी करार दिया है। करीब छह साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई, सैकड़ों गवाहों के बयान, पुख्ता फॉरेंसिक सबूतों और मैराथन ट्रायल के बाद आखिरकार अदालत ने ताहिर हुसैन व अन्य आरोपियों को कसूरवार माना। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर 6 साल पहले क्या हुआ था, कैसे अंकित शर्मा भीड़ की क्रूरता का शिकार बने और किस तरह ताहिर हुसैन इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड साबित हुआ।

क्रोनोलॉजी: 17 फरवरी 2020 से 13 जुलाई 2026 तक का पूरा सफर

  • 17-23 फरवरी 2020: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन और विरोध को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, चांदबाग और खजूरी खास जैसे इलाकों में तनाव चरम पर पहुंच गया था।

  • 24 फरवरी 2020: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अचानक सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। चारों तरफ पथराव, आगजनी और अंधाधुंध फायरिंग होने लगी।

  • 25 फरवरी 2020: यही वह मनहूस दिन था जब 26 वर्षीय आईबी अधिकारी अंकित शर्मा अपने घर से कुछ घरेलू सामान लेने निकले थे, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आए। इसी दिन चांदबाग में ताहिर हुसैन के मकान की छत से भारी पथराव और पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे।

  • 26 फरवरी 2020: खजूरी खास के एक गंदे नाले से अंकित शर्मा का क्षत-विक्षत शव मिलने से हड़कंप मच गया। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर दर्जनों धारदार हथियारों के गहरे घाव मिले। अंकित के पिता रविंद्र कुमार ने ताहिर हुसैन के खिलाफ हत्या की नामजद एफआईआर दर्ज कराई।

  • मार्च 2020: दिल्ली पुलिस की एसआईटी (SIT) ने ताहिर हुसैन को धर दबोचा। ताहिर के पांच मंजिला मकान की छत से भारी मात्रा में पत्थर, तेजाब के पैकेट, गुलेल और पेट्रोल बम बरामद हुए। पुलिस ने इसे दंगाइयों का ‘ऑपरेशन बेस’ करार दिया।

  • जून 2020: दिल्ली पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दावा किया कि अंकित शर्मा को दंगाइयों की हिंसक भीड़ ने घेरकर बेरहमी से मौत के घाट उतारा था।

  • 23 मार्च 2023: कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा फैलाने और आपराधिक साजिश रचने की गंभीर धाराओं में आरोप (Charges) तय किए।

  • 13 जुलाई 2026: लंबी बहस और गवाहियों के बाद कोर्ट ने ताहिर हुसैन को अंकित शर्मा हत्याकांड का मुख्य दोषी मानते हुए अपना अंतिम फैसला सुनाया।

कैसे दंगाइयों की नफरत का शिकार बने आईबी अफसर अंकित शर्मा?

अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में सुरक्षा सहायक (Security Assistant) के पद पर तैनात थे और अपने परिवार के साथ खजूरी खास इलाके में रहते थे। 25 फरवरी को जब इलाका दंगों की आग में झुलस रहा था, तब अंकित अपने परिवार के लिए कुछ सामान लेने बाहर गए थे।

तभी ताहिर हुसैन के घर के पास उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया। एक होनहार केंद्रीय खुफिया अधिकारी होने के बावजूद, वह उस वक्त निहत्थे थे। भीड़ ने उन पर धारदार हथियारों और लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हत्या करने के बाद आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने के इरादे से उनकी लाश को पास के ही खजूरी खास नाले में फेंक दिया था। इस बर्बरता ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

वो 4 पुख्ता सबूत, जिनकी वजह से ताहिर हुसैन कानून के शिकंजे में फंसा

दिल्ली पुलिस की तफ्तीश में ताहिर हुसैन को इस पूरी साजिश की धुरी बताया गया था, जिसे अदालत ने भी सही माना है:

  • पिता की चश्मदीद गवाही: अंकित शर्मा के पिता रविंद्र कुमार ने शुरू से ही आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन की छत से ही भीड़ को उकसाया जा रहा था और वहीं से हो रही गोलाबारी व पथराव के बीच उनके बेटे को निशाना बनाया गया।

  • चश्मदीदों के बयान: पुलिस ने कोर्ट में कई ऐसे गवाह पेश किए जिन्होंने ऑन-कैमरा और अदालत के सामने कुबूल किया कि ताहिर हुसैन खुद मौके पर मौजूद रहकर दंगाइयों की भीड़ का नेतृत्व कर रहा था।

  • छत पर मिला ‘बारूद का ढेर’: ताहिर के घर की तलाशी के दौरान मिले तेजाब के पाउच, विशाल गुलेलें, ड्रमों में भरे पत्थर और पेट्रोल बम इस बात का पुख्ता सबूत बने कि यह अचानक हुआ दंगा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।

  • डिजिटल और कॉल रिकॉर्ड (CDR): जांच एजेंसियों ने ताहिर हुसैन की मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और घटना के समय के वीडियो फुटेज को कोर्ट के सामने रखा, जिससे साबित हुआ कि वह झूठ बोल रहा था।

ताहिर का ‘विक्टिम कार्ड’ खारिज, सजा का एलान जल्द

पूरे मुकदमे के दौरान ताहिर हुसैन ने खुद को बेकसूर बताते हुए राजनीतिक साजिश का शिकार होने का दावा किया था। ताहिर का कहना था कि वह खुद दंगाइयों से डरा हुआ था और पुलिस से मदद मांग रहा था। हालांकि, अभियोजन पक्ष के अकाट्य तर्कों, साइंटिफिक एविडेंस और चश्मदीदों की गवाही के आगे कोर्ट में ताहिर हुसैन का यह ‘विक्टिम कार्ड’ पूरी तरह फेल हो गया। अदालत ने उसे दोषी करार दे दिया है और अब उसकी सजा (Quantum of Sentence) पर फैसला होना बाकी है, जिसमें उसे उम्रकैद या फांसी तक की सजा हो सकती है।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment