अयोध्या राम मंदिर में पहली बार होगी CEO की नियुक्ति: चंदा चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट का बड़ा फैसला, महिलाएं भी कर सकेंगी आवेदन

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर ली है. आंतरिक जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट और सिफारिशों के बाद ट्रस्ट पहली बार एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने जा रहा है. मंदिर निर्माण का काम अपने अंतिम दौर में है और यहां रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच रही है. ऐसे में करोड़ों रुपये के चढ़ावे की पारदर्शिता और विशाल व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है.

18 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन, 3 साल का होगा कार्यकाल

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 18 जुलाई, 2026 को शाम 4:00 बजे तक निर्धारित की गई है. शुरुआत में इस पद पर नियुक्ति 3 वर्ष के सेवा अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर की जाएगी, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा. इस पद के लिए चयनित होने वाले अधिकारी की पोस्टिंग रामनगरी अयोध्या में ही होगी.

महिलाओं को भी कमान मिलने की उम्मीद, ट्रस्ट में होगा ‘इमेज मेकओवर’

इस चयन प्रक्रिया की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ट्रस्ट ने इस पद के लिए पुरुष और महिला दोनों को समान अवसर दिया है. अयोध्या के राजनीतिक विश्लेषक नीशेंद्र मोहन का मानना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मौजूदा मूल बोर्ड या मुख्य समितियों में फिलहाल एक भी महिला सदस्य नहीं है. ऐसे में यदि देश के इस सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल के पहले सीईओ के रूप में किसी महिला की नियुक्ति होती है, तो यह केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होगा. यह महिला प्रतिनिधित्व को लेकर उठते सवालों का जवाब देने और ट्रस्ट की छवि को अधिक समावेशी व पारदर्शी बनाने (डैमेज कंट्रोल) की दिशा में एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश साबित होगा.

योग्यता के कड़े मापदंड: 20 साल का अनुभव और राम में अटूट आस्था जरूरी

ट्रस्ट किसी विशेष पेशे या सेवा पृष्ठभूमि को प्राथमिकता नहीं दे रहा है. कॉरपोरेट जगत, प्रशासनिक सेवा (IAS/PCS), पुलिस (IPS), सशस्त्र बलों या अर्धसैनिक बलों से सेवानिवृत्त अधिकारी भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, इसके लिए कुछ कड़े मापदंड तय किए गए हैं:

  • 20 वर्षों का प्रबंधकीय अनुभव: आवेदक के पास किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, सरकारी विभाग या प्रतिष्ठित कंपनी में प्रशासन, वित्त, लेखा, कार्मिक, जनसंपर्क, आईटी, सुरक्षा और कानून जैसे बहु-आयामी क्षेत्रों में काम करने का कम से कम 20 साल का अनुभव होना अनिवार्य है.

  • धार्मिक प्रबंधन को वरीयता: किसी प्रसिद्ध मंदिर या हिंदू धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी.

  • ईमानदारी और समर्पण: चयन समिति के अनुसार, उम्मीदवार केवल एक कुशल मैनेजर ही न हो, बल्कि भगवान राम के प्रति उसकी गहरी आस्था भी होनी चाहिए. यहां विनम्रता, समर्पण और भक्तों की सेवा का भाव सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होगा.

चयन के लिए बनी 3 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल कमेटी, नहीं होगी कोई आयु सीमा

सीईओ के चयन के लिए ट्रस्ट ने 6 जुलाई को एक बेहद उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस कमेटी में शामिल हैं:

  1. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली: सिक्किम हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और कैट (CAT) के पूर्व अध्यक्ष, जो अपने लंबे न्यायिक और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते हैं.

  2. लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी: भारतीय सेना में चार दशकों तक कुशल नेतृत्व और अनुशासन का लोहा मनवाने वाले सैन्य अधिकारी.

  3. सुरेश हवारे: महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित उद्योगपति और हावरे ग्रुप के प्रमुख, जो बड़े व्यावसायिक संगठनों के कुशल प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं.

इस पद के लिए फिलहाल न तो कोई अधिकतम आयु सीमा तय की गई है और न ही वेतनमान. सैलरी का निर्धारण चयन के बाद आपसी सहमति से किया जाएगा.

सरकारी हस्तक्षेप से दूर रहेगा प्रशासन, नए CEO पर होंगी ये बड़ी जिम्मेदारियां

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने साफ किया है कि नवनियुक्त सीईओ पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करेंगे और उनके कामकाज में सरकार की कोई भूमिका या दखल नहीं होगा. सीईओ ट्रस्ट के एक सहायक के रूप में काम करेंगे और अपनी टीम (स्टाफ) का चयन भी स्वयं कर सकेंगे.

नए सीईओ के कंधों पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और ऑडिटेड रखना होगा, ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे. इसके अलावा, रोजाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना भी सीईओ के मुख्य दायित्वों में शामिल होगा.

आगामी 22 जुलाई, 2026 को अयोध्या में ट्रस्ट की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ इस नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी.

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