नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी करीब 20 दिनों के विदेशी दौरे के बाद सोमवार को भारत लौट आए हैं. हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने उनकी इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक ब्योरा साझा नहीं किया है, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल यूरोप के दौरे पर थे. हमेशा की तरह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उनकी इस अचानक छुट्टी को लेकर सियासी तीर छोड़ने शुरू कर दिए हैं, लेकिन देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए असली चर्चा राहुल की छुट्टी नहीं, बल्कि वतन वापसी के साथ ही उनके सामने खड़ी तीन सबसे बड़ी अग्निपरीक्षाएं हैं.
पहली चुनौती: पंजाब से लेकर यूपी और गोवा तक कांग्रेस की अंदरूनी कलह
आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं, लेकिन कांग्रेस चुनावी रण में उतरने से पहले अपने ही घर की गुटबाजी से परेशान है. राहुल गांधी को लौटते ही इन तीन राज्यों में सख्त फैसले लेने होंगे:
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पंजाब में बगावत के सुर: पंजाब कांग्रेस में इस समय गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई दिग्गज नेता प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पद से हटाने की जिद पर अड़े हैं. हालांकि, पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल साफ कर चुके हैं कि नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन अंदरखाने चल रही यह खींचतान राहुल गांधी के लिए बड़ी सिरदर्दी बन गई है.
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उत्तर प्रदेश में सीट शेयरिंग और संगठन: यूपी में समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय होना बाकी है. एक तरफ कांग्रेस बराबरी के हक का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमलावर हैं. इसके अलावा, यूपी कांग्रेस के संगठन में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट भी तेज है.
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गोवा में पुराना बनाम नया: गोवा में हाल ही में गिरीश चोडणकर को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जिसके बाद से पूर्व अध्यक्ष अमित पाटकर के गुट की नाराजगी की खबरें आलाकमान की टेंशन बढ़ा रही हैं.
दूसरी चुनौती: ‘छात्रों की गूंज’ आंदोलन को धार देना और युवाओं को जोड़ना
राहुल गांधी के भारत लौटते ही पार्टी उनके आगामी दौरों को अंतिम रूप देने में जुट गई है. राहुल आगामी 17 जुलाई, 2026 को उत्तराखंड के देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे.
बता दें कि इस अभियान की शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से हुई थी, जो मुख्य रूप से देश में पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित है. देहरादून के बाद देश के कई अन्य बड़े शहरों में राहुल के कार्यक्रम होने हैं. इसके बाद 9 अगस्त, 2026 को दिल्ली में एक महारैली की तैयारी की जा रही है, जिसके जरिए कांग्रेस युवाओं को अपने पाले में लाने का बड़ा दांव खेलने जा रही है.
तीसरी चुनौती: संसद का मानसून सत्र, विपक्ष को एकजुट रखना सबसे बड़ा टास्क
आगामी 20 जुलाई, 2026 से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है. बतौर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लिए यह सत्र बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है. विपक्ष इस बार पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और एथनॉल युक्त पेट्रोल जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार को चौतरफा घेरने का प्लान बना चुका है.
वहीं दूसरी ओर, बीजेपी संसद के भीतर दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए अपने सहयोगी दलों के कुनबे को मजबूत करने में लगी है. चर्चा है कि यदि सत्ता पक्ष यह बहुमत जुटा लेता है, तो सरकार ‘एक देश-एक चुनाव’, महिला आरक्षण लागू करने और देश में परिसीमन जैसे बड़े संवैधानिक विधेयकों को पटल पर रख सकती है. ऐसे में राहुल गांधी के कंधों पर सरकार को घेरने के साथ-साथ पूरे विपक्षी कुनबे (INDIA ब्लॉक) को संसद में एकजुट रखने की दोहरी जिम्मेदारी होगी.
कल सुबह मल्लिकार्जुन खरगे से होगी अहम मुलाकात
विदेश से लौटने के बाद राहुल गांधी कल यानी मंगलवार की सुबह सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे. इस हाई-प्रोफाइल बैठक में चुनावी राज्यों की रणनीति, संसद सत्र की रूपरेखा और ‘छात्रों की गूंज’ आंदोलन के अगले चरणों पर विस्तार से चर्चा होगी. देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी इन चुनौतियों को कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक अवसर में कैसे तब्दील करते हैं.















