जम्मू: श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के खजाने से जुड़े 550 करोड़ रुपये के ‘नकली चांदी’ महाघोटाले में जम्मू की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच एजेंसी को आड़े हाथों लिया है. जम्मू के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) मुनीश कुमार मन्हास की अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी (IO) को सख्त निर्देश दिया है कि वे मामले से जुड़े सभी असली दस्तावेजों और केस डायरी के साथ आगामी सुनवाई पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों. इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई, 2026 को तय की गई है.
क्या है 550 करोड़ का ‘नकली चांदी’ विवाद?
माता वैष्णो देवी के दरबार में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाए गए सोने-चांदी के विशाल भंडार में हेराफेरी का यह मामला बेहद चौंकाने वाला है.
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20 टन चांदी का सच: श्राइन बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करीब 20 टन (20,000 किलोग्राम) चांदी के सिक्कों, बर्तनों और आभूषणों को शुद्धता की जांच, पिघलाने और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया था. इस विशाल भंडार की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये आंकी गई थी.
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जांच रिपोर्ट में खुलासा: जब इस चांदी की लैब टेस्टिंग और रिफाइनिंग की गई, तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई. 20 टन के इस विशाल जखीरे में सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत ही असली चांदी पाई गई, जबकि बाकी की लगभग 94 फीसदी चांदी नकली निकली.
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जहरीली धातु की मिलावट: जांच में पाया गया कि असली चांदी की जगह भारी मात्रा में कैडमियम, लोहा और अन्य घटिया व सस्ती धातुओं का इस्तेमाल किया गया था.
वकील दीपक शर्मा की कोर्ट में अर्जी: आपराधिक साजिश और गबन के आरोप
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जम्मू के प्रसिद्ध वकील दीपक शर्मा ने 9 मई, 2026 को पुलिस महानिरीक्षक (क्राइम ब्रांच, जम्मू) और एसएसपी (आर्थिक अपराध शाखा) के समक्ष एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी. पुलिस द्वारा इस मामले में कोई ठोस कदम न उठाए जाने के बाद उन्होंने कोर्ट का रुख किया.
वकील दीपक शर्मा ने अपनी शिकायत में गंभीर संज्ञेय अपराधों के आरोप लगाए हैं, जिनमें:
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आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी (Cheating)
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विश्वासघात और सरकारी संपत्ति का गबन
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अधिकारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेरफेर
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नकली चांदी और कैडमियम-युक्त सामग्री की अवैध खरीद-बिक्री शामिल है.
उन्होंने अदालत से मांग की है कि इस बात की गहराई से जांच हो कि क्या दुकानदारों ने श्रद्धालुओं को ही नकली चांदी बेची थी, या फिर श्राइन बोर्ड के कस्टडी रूम, वजन करने, स्टोरेज या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान असली चांदी को गायब कर उसकी जगह नकली धातु रख दी गई.
‘क्राइम ब्रांच अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती’ – अदालत में तीखी बहस
सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की. रिपोर्ट में बताया गया कि शिकायत को पहले प्रशासनिक मंजूरी के लिए श्रीनगर स्थित क्राइम हेडक्वार्टर भेजा गया था, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए जोनल पुलिस हेडक्वार्टर जम्मू को ट्रांसफर कर दिया गया है.
इस पर याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने कोर्ट में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. उन्होंने दलील दी कि:
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स्वतंत्र पुलिस स्टेशन: क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) जम्मू खुद गृह विभाग द्वारा अधिसूचित एक स्वतंत्र पुलिस स्टेशन है, जिसके एसपी (SP) कानूनन स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के रूप में कार्य करते हैं.
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कानूनी उल्लंघन: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर सीधे एफआईआर दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है. पुलिस शिकायत को केवल एक विभाग से दूसरे विभाग में ट्रांसफर करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती.
सबूत मिटने का खतरा: सीसीटीवी और इन्वेंट्री रिकॉर्ड को जब्त करने की मांग
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को सचेत किया कि क्राइम ब्रांच की स्टेटस रिपोर्ट में घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए किसी भी कदम का जिक्र नहीं है. उन्होंने मांग की है कि जांच प्रभावित होने से पहले निम्नलिखित डिजिटल और फिजिकल सबूतों को तुरंत जब्त किया जाए:
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श्राइन बोर्ड के इन्वेंट्री रजिस्टर और स्टॉक रिकॉर्ड्स
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स्टोरेज रूम और ट्रांसपोर्टेशन रूट के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज
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चांदी की शुद्धता जांचने वाली एसे रिपोर्ट (Assay Reports)
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सरकारी टकसाल (Mint) और श्राइन बोर्ड के बीच हुआ आधिकारिक पत्राचार
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चांदी के परिवहन, हैंडलिंग और कस्टडी से जुड़े दस्तावेज.
अदालत ने इन दलीलों को बेहद गंभीर मानते हुए क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई, 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का फरमान सुनाया है, जिसके बाद अब इस मामले में बड़े अफसरों और कस्टोडियन्स पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.















