सुप्रीम कोर्ट हंगामा मामला: कोर्टरूम में बवाल काटने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, CJI पर टिप्पणी और बेंच पर कागज फेंकने का आरोप

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के भीतर जजों के सामने हंगामा करने और अभद्र व्यवहार करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने इस मामले में कानून (लॉ) की पढ़ाई कर रहे दो छात्रों को गिरफ्तार किया है। इस अभूतपूर्व घटना को लेकर दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई है।

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान लखनऊ यूनिवर्सिटी के लॉ थर्ड ईयर के छात्र प्रबल प्रताप सिंह (24 वर्ष) और इसी यूनिवर्सिटी के लॉ सेकंड ईयर के छात्र चंद्र भान (23 वर्ष) के रूप में हुई है।

सरकारी काम में बाधा डालने सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने और न्यायालय की मर्यादा को ठेस पहुंचाने सहित कई अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं में केस दर्ज किया है। मामले की प्राथमिक जांच और सबूतों को खंगालने के बाद पुलिस ने मंगलवार की देर रात दोनों छात्रों को दबोच लिया।

जानकारी के अनुसार, तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा स्टाफ (Security Staff) द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान और शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

कोर्ट नंबर 13 में सुनवाई के दौरान हुआ था हाई-वोल्टेज ड्रामा

यह पूरी घटना 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 में घटित हुई थी। उस वक्त अदालत में एसएलपी संख्या 31367/2026 ($SLP\ No.\ 31367/2026$ – प्रबल प्रताप और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) के मामले पर सुनवाई चल रही थी।

इस केस में आरोपी छात्र प्रबल प्रताप सिंह यादव किसी वकील के बजाय स्वयं (इन-पर्सन) अपनी पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान जैसे ही अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ी, आरोपी छात्र अचानक उग्र हो गए और उन्होंने अदालती कार्यवाही में व्यवधान डालना शुरू कर दिया।

CJI पर की अभद्र टिप्पणी, बेंच की तरफ उछाले कागजात

हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक, अमर्यादित और अभद्र टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं। इतने से भी जब मन नहीं भरा, तो उन्होंने गुस्से में आकर जजों की बेंच की तरफ सीधे कागज फेंक दिए। इस औचक हंगामे और आक्रामक व्यवहार के चलते शीर्ष अदालत की कार्यवाही कुछ समय के लिए पूरी तरह से बाधित हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। अब पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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