
मुजफ्फराबाद/रावलाकोट। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर से हालात बेकाबू हो गए हैं और चारों तरफ हिंसा की आग भड़क उठी है। रावलाकोट में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों द्वारा स्थानीय निवासियों के खिलाफ चलाए गए एक बर्बर दमनकारी अभियान के बाद शहर के न्यू बस टर्मिनल के पास हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। इस दौरान आक्रोशित नागरिकों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने सरेआम अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं, जिससे 9 बेकसूर नागरिकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस भीषण खूनखराबे ने पूरे इलाके में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और इस्लामाबाद की हुकूमत के खिलाफ नाराजगी और तेज हो गई है।
अपनों को खोकर सड़कों पर उतरे लोग, मटियाल मीरा बस टर्मिनल बना अखाड़ा
पाकिस्तानी फौज की इस कायराना गोलीबारी में जान गंवाने वाले स्थानीय लोगों में जाहिद मुगल, जफर मुगल, अर्सलान अकबर और वाजिद हयात जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वाजिद हयात को रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल पर सुरक्षाबलों ने बेहद करीब से निशाना बनाया। अपनों की मौत से गुस्साए हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। पूरे शहर में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं, जिसके बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा और खौफ का माहौल पसरा हुआ है।
व्हाइट हाउस के बाहर गूंजी PoK की आवाज, दुनिया से दमन रोकने की अपील
रावलाकोट में हुए इस कत्लेआम से ठीक एक दिन पहले अमेरिका में रह रहे जम्मू-कश्मीर के प्रवासियों ने वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस के बाहर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने रोष जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी जन्मभूमि पर रह रहे लोग इस समय बदतर मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) से जूझ रहे हैं। वहां पाकिस्तानी सेना स्थानीय लोगों को जबरन उठाकर मौत के घाट उतार रही है। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति समेत दुनिया भर के बड़े नेताओं से अपील की है कि वे पाकिस्तानी फौज की इन दमनकारी करतूतों को रोकने के लिए फौरन कोई बड़ा और कड़ा कदम उठाएं।
सेना को हटाने की मांग, इंटरनेट शटडाउन से 40 लाख लोग कटे
इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और समुदाय के कई बड़े नेताओं समेत लगभग 100 से अधिक लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुरजोर मांग की कि पाकिस्तानी सेना को तत्काल प्रभाव से PoK के नागरिक रिहायशी इलाकों से पूरी तरह हटा लिया जाए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की कि वे निहत्थे नागरिकों पर घातक हथियारों के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच कराएं।
प्रदर्शनकारियों ने घाटी में लंबे समय से जारी इंटरनेट शटडाउन का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उनका दावा है कि डिजिटल नाकेबंदी के कारण लगभग 40 लाख लोग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट चुके हैं और वहां क्या हो रहा है, यह दुनिया तक नहीं पहुंच पा रहा है।
स्थानीय लोगों ने लगाई गुहार: ‘भारत करे दखल, हमारे लिए खोले नियंत्रण रेखा (LoC)’
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की एक अनोखी और भावुक अपील कर डाली। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना के जुल्म से उनकी जान बचाने और मानवीय राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारत को आगे आना चाहिए। प्रभावित नागरिकों तक दवाइयां और भोजन पहुंचाने के लिए पुंछ और डोडा सेक्टर के रास्ते नियंत्रण रेखा (LoC) को तुरंत खोलने की मांग भी तेज हो गई है।
भारत ने पाकिस्तान को घेरा: ‘दशकों के शोषण और प्रशासनिक दमन का नतीजा है यह गुस्सा’
PoK में भड़की इस ताजा हिंसा पर नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि ये झड़पें पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे “व्यवस्थित शोषण” का सीधा नतीजा हैं। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “PoJK में चल रहे ये विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान द्वारा पिछले कई दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखने और उसके अवैध व जबरन कब्जे वाले इलाकों में जारी प्रशासनिक दमन का स्वाभाविक परिणाम हैं।”
प्रवक्ता ने आगे कहा कि भारत को पूरी उम्मीद है कि वैश्विक समुदाय PoK की जमीनी हकीकत और वहां हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान देगा और इन अत्याचारों के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिम्मेदार ठहराएगा।
क्यों सुलग रहा है PoK? जानिए अशांति की मुख्य वजह
इलाके में अशांति की यह नई और खतरनाक लहर तब शुरू हुई, जब पाकिस्तान के दूसरे प्रांतों में रह रहे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए पाक-अधिकृत कश्मीर की विधानसभा में 12 सीटें आरक्षित करने का फैसला किया गया। स्थानीय नागरिक इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इस विरोध को कुचलने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में धारा-144 जैसी पाबंदियां लगा दी हैं, इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं और विरोध का नेतृत्व कर रहे स्थानीय नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर जेलों में ठूंसा जा रहा है।














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