
नई दिल्ली/वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के कायाकल्प के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये के मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी गई है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी पर दो बेहद भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब वाराणसी एयरपोर्ट से बाबा विश्वनाथ के दरबार तक पहुंचने में जहां महज 15 मिनट लगेंगे, वहीं बीएचयू (BHU) का सफर सिर्फ 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में लोगों को करीब 45 मिनट से एक घंटे तक का समय जाम में गंवाना पड़ता है।
100 की रफ्तार से दौड़ेंगे वाहन, सालाना बचेगा 1.25 करोड़ लीटर ईंधन
इस महापरियोजना के धरातल पर उतरने के बाद सड़कों पर वाहनों की रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा तक हो सकेगी। इन दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर से वाराणसी शहर को न सिर्फ भीषण जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी, बल्कि पर्यावरण और जेब को भी बड़ा फायदा होगा। अनुमान के मुताबिक, जाम खत्म होने से सालाना करीब 1.25 करोड़ लीटर फ्यूल (ईंधन) की बचत होगी। इसके साथ ही काशी में व्यापार में 30 फीसदी और पर्यटन क्षेत्र में 50 फीसदी तक की बंपर बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
गंगा और वरुणा कॉरिडोर: जानिए दोनों प्रोजेक्ट्स की पूरी रूपरेखा
इस महायोजना के तहत पहला कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) और वाराणसी रिंग रोड के बीच गंगा नदी पर बनाया जाएगा। यह 46 किलोमीटर लंबा सिक्स-लेन कॉरिडोर होगा, जिसे 14,447 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा।
दूसरा कनेक्टिविटी कॉरिडोर वरुणा नदी पर प्रस्तावित है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में मुख्य कैरिजवे, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड सहित 6/4-लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है। इसके बनने से वाराणसी एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी, वाराणसी जंक्शन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, रामनगर पोर्ट, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और चंदौली क्षेत्र तक की कनेक्टिविटी बेहद शानदार हो जाएगी।
बाबा के दरबार के लिए बिल्कुल नया मार्ग, बेतिया स्टेट की जमीन पर बनेगी मल्टीलेवल पार्किंग
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोदी सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने का एक बिल्कुल नया और अनूठा मार्ग तैयार किया है। इसके तहत रामनगर की तरफ से सीधे मंदिर तक गंगा नदी पर एक भव्य पुल का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए बिहार सरकार ने रामनगर में स्थित बेतिया स्टेट की 8 एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है।
इस 8 एकड़ जमीन पर 5,000 गाड़ियों की क्षमता वाली एक अत्याधुनिक मल्टी लेवल पार्किंग बनाई जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड से आने वाले श्रद्धालु बिना वाराणसी शहर के मुख्य ट्रैफिक में प्रवेश किए, सीधे अपनी गाड़ियां खड़ी कर मंदिर जा सकेंगे। वाराणसी के मण्डलायुक्त एस. राज लिंगम ने बताया कि वाराणसी देश का एकमात्र ऐसा शहर बन गया है, जिसके सड़क विकास पर साल 2014 से अब तक रिकॉर्ड 59,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
साल 2028 तक पूरा होगा काम, विपक्षी दलों पर बरसे डिप्टी सीएम
सरकार ने इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इनके तैयार होने के बाद लखनऊ, प्रयागराज और जौनपुर की तरफ से आने वाले लोगों को शहर के भीतर रेंगते ट्रैफिक से नहीं जूझना पड़ेगा।
इस ऐतिहासिक सौगात पर खुशी जताते हुए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “यह काशी के लिए बहुत बड़ी सौगात है, जिससे बाबा की नगरी और भी भव्य व दिव्य बनेगी। इसका लाभ वाराणसी के साथ-साथ गाजीपुर और चंदौली जैसे पड़ोसी जिलों को भी मिलेगा।” विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो काशी सपा और कांग्रेस के शासनकाल में अपनी पहचान के संकट से जूझ रही थी, आज वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बन चुकी है, जहां हर साल 15 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं।













